देश में पहली बार सांकेतिक भाषा मध्यस्थता से मूक-बधिरों को मिला न्याय, इंदौर के साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट्स ने संपत्ति विवाद में की मदद

देश में पहली बार मूक-बधिर दंपती को सांकेतिक भाषा मध्यस्थता से संपत्ति में हक मिला है। दरअसल इंदौर के विशेषज्ञों ने यह संभव कर दिखाया है। अब मप्र में 5 विशेष केंद्र खुलेंगे।
देश में पहली बार सांकेतिक भाषा मध्यस्थता से मूक-बधिरों को मिला न्याय, इंदौर के साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट्स ने संपत्ति विवाद में की मदद

इंदौर के साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट्स ने देश में पहली बार सांकेतिक भाषा मध्यस्थता से मूक-बधिर दंपती को संपत्ति विवाद में हक दिलवाया है। दरअसल यह मामला मूक-बधिरों से जुड़े विवादों में सुलह और न्याय दिलाने की दिशा में एक बड़ी पहल है। देश में यह पहला ऑनलाइन समझौता है जो सांकेतिक भाषा के माध्यम से संपन्न हुआ है।

दरअसल इस मामले में इंदौर के साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट ज्ञानेंद्र पुरोहित और अतुल राठौर ने दंपती की समस्या को समझा। उन्होंने तैयार की गई मेडिएशन रिपोर्ट शाजापुर कोर्ट में पेश की, जिसे कोर्ट ने एक मजबूत आधार माना। दरअसल, दंपती के परिवार के लोग उन्हें संपत्ति में उनका हक नहीं दे रहे थे। मध्यस्थता के बाद वे इसके लिए तैयार हो गए और दंपती को न्याय मिल सका।

जानिए क्या है पूरा मामला?

वहीं साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट्स ने दंपती की दो बार ऑनलाइन सुनवाई की। इसमें दंपती के अलावा उनके ससुराल पक्ष के लोग भी शामिल हुए। विशेषज्ञों ने उन्हें स्पष्ट किया कि दंपती भले ही मूक-बधिर हैं, लेकिन परिवार उन्हें कानूनन संपत्ति के हक से वंचित नहीं कर सकता। वे भी संपत्ति के हकदार हैं। इसके साथ ही संपत्ति से जुड़े कानूनों की जानकारी भी दी गई। इस पर ससुराल पक्ष ने अपनी गलती स्वीकार की और प्रॉपर्टी में हिस्सा देने के लिए राजी हो गया। मामले की आखिरी सुनवाई 18 अप्रैल को हुई। इसके बाद एक्सपर्ट्स ने रिपोर्ट शाजापुर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोर्ट में पेश की। कोर्ट ने 18 अप्रैल को इस रिपोर्ट को आधार मानकर दंपती को न्याय दिलाया। ससुराल पक्ष ने संपत्ति का हक देने के साथ ही दंपती के घर की कटी हुई बिजली भी फिर से चालू करवा दी है। अब दंपती खुश हैं।

एक अन्य मामला भी सामने आया

एक अन्य मूक-बधिर दंपती के तलाक का मामला भी सामने आया है। युवक मूलतः पांढुर्णा का है। शादी के बाद से ही दोनों में वैचारिक मतभेद बढ़ने लगे और आए दिन विवाद होने लगे। पिछले साल दोनों ने तलाक के लिए इंदौर फैमिली कोर्ट का रुख किया। यहां दोनों अपना पक्ष सही तरीके से रख नहीं पा रहे थे, जिस पर इंदौर के साइन एक्सपर्ट्स की मदद ली गई। 8 मई को इसमें पहली बार मध्यस्थता हुई, जिसमें एक पक्ष तलाक न देने के लिए पूरी तरह सहमत हो गया, जबकि दूसरा पक्ष अभी पूरी तरह सहमत नहीं है। इसकी अगली सुनवाई 27 जून को निर्धारित की गई है।

देश में पहली बार ऐसा हुआ

देश में पहली बार मूक-बधिरों को सांकेतिक भाषा के माध्यम से न्याय दिलाने की तैयारी पूरी हो गई है। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने मूक-बधिरों के सालों से लंबित मामलों के जल्द निराकरण के लिए 28 लोगों की एक विशेष टीम गठित की है, जिसे ‘स्पेशल-28’ नाम दिया गया है। इन 28 मध्यस्थों में 21 मूक-बधिर हैं और 7 साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट शामिल हैं। इस टीम में 9 महिलाएं भी हैं। ये मध्यस्थ मूक-बधिरों के वैवाहिक, पारिवारिक और संपत्ति से जुड़े विवादों को कोर्ट से बाहर आपसी सहमति से सुलझाएंगे। इस ‘स्पेशल-28’ टीम को सुप्रीम कोर्ट से भी हरी झंडी मिल गई है। अब देश में कोई भी मूक-बधिर अपने पारिवारिक या सिविल विवादों में इनकी मदद ले सकेगा।

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा के नेतृत्व में और मध्य प्रदेश विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस विवेक रूसिया के मार्गदर्शन में 1 अप्रैल से एक्सपर्ट मीडिएटर्स ने मध्यस्थता शुरू भी कर दी है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत 16 मई को जबलपुर आ रहे हैं। संभवतः इसी दिन मध्यप्रदेश में मूक-बधिरों के लिए 5 विशेष मध्यस्थता केंद्र इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा और सीधी में शुरू किए जाएंगे। ये केंद्र इंदौर में तुकोगंज थाना, भोपाल में महिला थाना, जबलपुर में लॉर्डगंज, रीवा में बिछिया थाना और सीधी में कोतवाली थाना में स्थापित होंगे।

Banshika Sharma
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कंटेंट राइटर

मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
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