अब भाजपा सांसद की फिसली जुबान, गैंगस्टर को ‘जी’ कहकर दिया सम्मान!

अब भाजपा सांसद की फिसली जुबान, गैंगस्टर को ‘जी’ कहकर दिया सम्मान!

इंदौर|आकाश धोलपुरे| पहले मंत्री तुलसी सिलावट (Tulsi Silavat) की जुबान फिसलने का वीडियो तेजी से इंदौर सहित समूचे प्रदेश में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ| हालांकि मंत्री सिलावट का वीडियो किस हद तक सत्य है ये अभी प्रमाणित नही हो पाया है, इसकी पुष्टि तो स्वयं मंत्री सिलावट करेंगे| इसी बीच अब इंदौर सांसद शंकर लालवानी (Shankar Lalwani) का वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमे वो गैंगस्टर विकास दुबे (Vikas Dubey) को ‘दुबेजी’ कह गए|

दरअसल, पहले मंत्री जी से विकास दुबे एनकाउंटर पर सवाल पूछा गया और इसी तरह एक कार्यक्रम के दौरान इंदौर से बीजेपी सांसद से इस संदर्भ में एक सवाल मीडिया द्वारा पूछा गया तब इंदौर सांसद शंकर लालवानी का जबाव कांग्रेस को घेरने के लिए था लेकिन अचानक उनकी जुबान फिसली और उन्होंने पहले तो विकास दुबे को सन्तोष दुबे बता दिया साथी ही में दुबे को दुबेजी कहकर सम्बोधित किया|

दरअसल, संतोष दुबे इंदौर का चर्चित कांग्रेसी चेहरा था जिनकी हत्या स्किम नम्बर 71 के एक जिम में हो गई थी। सांसद विकास दुबे एनकाउंटर मामले में मीडिया को जबाव देने में इतने उत्सुक थे कि उन्होंने गैंगस्टर विकास दुबे को पहले तो जी कहकर संबोधित किया और उसके बाद अचानक गफलत में सन्तोष दुबे बोल गए और इसके बाद अपनी जुबान की फिसलन पर वो खुद ही माथा ठोकते नजर आए| क्योंकि उन्हें अहसास हो चुका था कि उन्होंने जो कहा है वो वाकई समय और परिस्थितियों से दूर दूर तक कोई तार्रुफ़ नही रखता है। फिलहाल, यूपी में कार की पलटन और इंदौर में जुबान की फिसलन अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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