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पाकिस्तान के पेशावर में इस्लामिया कॉलेज का तालिबानी फरमान, छात्राओं की पुरुष शिक्षकों से बातचीत पर लगाया बैन, अब CM से लेनी होगी NOC

Written by:Rishabh Namdev
Published:
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह स्थित इस्लामिया कॉलेज पेशावर ने एक विवादित आदेश जारी किया है, जिसमें छात्राओं के पुरुष शिक्षकों और छात्रों के महिला शिक्षकों से बातचीत पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इस 'तालिबानी फरमान' के तहत, किसी भी जरूरी संवाद के लिए अब मुख्यमंत्री या गवर्नर से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होगा।
पाकिस्तान के पेशावर में इस्लामिया कॉलेज का तालिबानी फरमान, छात्राओं की पुरुष शिक्षकों से बातचीत पर लगाया बैन, अब CM से लेनी होगी NOC

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत की राजधानी पेशावर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां स्थित सरकारी विश्वविद्यालय, इस्लामिया कॉलेज पेशावर, ने एक तालिबानी फरमान जारी करते हुए महिला छात्राओं और पुरुष शिक्षकों के बीच किसी भी तरह की बातचीत पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह नियम पुरुष छात्रों और महिला शिक्षकों पर भी समान रूप से लागू होता है।

यह आदेश कॉलेज के पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट के अध्यक्ष डॉ आमिर उल्लाह खान की ओर से जारी किया गया है। इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि न तो छात्राएं पुरुष शिक्षकों के दफ्तर में जा सकेंगी और न ही छात्र महिला शिक्षकों के दफ्तर में प्रवेश कर पाएंगे। इस फैसले को लेकर पाकिस्तान में महिला शिक्षा और अधिकारों पर एक नई बहस छिड़ गई है।

मुख्यमंत्री से लेनी होगी NOC

इस अजीबोगरीब आदेश में एक और भी चौंकाने वाली शर्त जोड़ी गई है। सर्कुलर के मुताबिक, अगर किसी विशेष परिस्थिति में किसी छात्रा को पुरुष शिक्षक से या किसी छात्र को महिला शिक्षक से बात करना ‘अति आवश्यक’ हो, तो इसके लिए एक लंबी प्रक्रिया का पालन करना होगा।

इसके लिए उन्हें खैबर पख्तूनख्वाह के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी या प्रांत के गवर्नर (जो विश्वविद्यालय के चांसलर भी हैं) से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) हासिल करना होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने दावा किया है कि यह आदेश छात्र-छात्राओं की भलाई के लिए और मुख्यमंत्री व चांसलर के निर्देश पर ही जारी किया गया है।

महिला शिक्षा में पिछड़ा है खैबर पख्तूनख्वाह

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही महिला शिक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना कर रहा है। यह प्रांत महिला शिक्षा के मामले में काफी पिछड़ा हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वाह में महिला साक्षरता दर महज 37 फीसदी है, जबकि पूरे पाकिस्तान में यह आंकड़ा केवल 52 फीसदी है। ऐसे में इस तरह के प्रतिगामी कदम महिलाओं की शिक्षा की राह में और बाधाएं खड़ी कर सकते हैं।

इमरान खान की नीतियों के खिलाफ मौजूदा सरकार?

दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी के ये कदम उनकी ही पार्टी के प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की घोषित नीतियों के बिल्कुल विपरीत हैं। इमरान खान प्रधानमंत्री रहते हुए और उससे पहले भी लगातार महिलाओं को पुरुषों के बराबर लाने और सामाजिक कुप्रथाओं को खत्म करने की वकालत करते थे। लेकिन अब उन्हीं की पार्टी के मुख्यमंत्री के राज में प्रांत के सबसे पुराने कॉलेजों में से एक में इस तरह की पाबंदी लगा दी गई है।

सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि सोहेल अफरीदी के मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रांत में आतंकी संगठनों की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। जहां इमरान खान ने नेशनल एक्शन प्लान के तहत लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन के कैंप बंद करवाए थे, वहीं अब लोअर डिर और मनसेहरा जैसे इलाकों में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर के ट्रेनिंग कैंप फिर से सक्रिय होने की खबरें हैं।

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