आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने दिए 48 माह का एरियर्स देने के आदेश, 6 फीसदी ब्याज की शर्त हटाई

हाई कोर्ट ने 2019 से 2023 तक का 48 माह का एरियर्स देने के दिए निर्देश। 6% ब्याज देने की शर्त हटाई, सरकार पर करीब 1400 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार। 2019 में केंद्र द्वारा बढ़ाए गए मानदेय के बाद शुरू हुआ था अंशदान का विवाद।
MP High Court Order on Anganwadi Workers

MP High Court Order on Anganwadi Workers

मध्य प्रदेश में काम कर रहे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए ये अच्छी खबर है। उनके लंबित एरियर को लेकर  हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए वर्ष 2019 से 2023 तक का 48 माह का एरियर्स आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को देने के निर्देश दिए हैं। हालांकि हाई कोर्ट ने एरियर्स के साथ 6 प्रतिशत ब्याज देने की शर्त को हटा दिया है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लंबे समय से इस मामले पर संघर्ष कर रहे थे, जब सरकार ने उनकी नहीं सुनी तो उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और आज न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला देकर सरकार को 48 महीने के एरियर भुगतान का आदेश दिया।

2019 में केंद्र सरकार ने बढ़ाया था मानदेय  

गौरतलब है कि 2019 में केंद्र सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाया था लेकिन मानदेय बढ़ने के साथ ही मध्य प्रदेश सरकार ने अपना अंशदान घटा लिया था, इस निर्णय के खिलाफ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हाई कोर्ट गए जहाँ 2023 में अदालत के आदेश पर सरकार ने अंशदान बहाल कर दिया।

2019 से 2023 के एरियर्स पर फैसला

2019 से 2023 तक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता क़ानूनी लड़ाई लड़ते रहे अब हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील पर फैसला सुनाते हुए संबंधित अवधि का 48 माह का एरियर्स देने के निर्देश दिए हैं। हालांकि एरियर्स पर 6 प्रतिशत ब्याज देने की शर्त समाप्त कर दी गई है। राज्य सरकार के इस फैसले के खिलाफ अपील करने की संभावना जताई जा रही है।

राज्य सरकार पर आयेगा 1400 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद सरकार को करीब 1400 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार उठाना होगा। जानकारी के अनुसार, कुल देय राशि करीब 1700 करोड़ रुपये थी, जिसमें लगभग 300 करोड़ रुपये ब्याज के थे। हाई कोर्ट द्वारा ब्याज की शर्त हटाए जाने से यह राशि कम हो गई है।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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