
भोपाल के ट्विशा शर्मा सुसाइड केस में रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह को जबलपुर हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। दरअसल जबलपुर हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। गिरिबाला सिंह पर आरोप है कि उन्होंने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी अपने बेटे समर्थ सिंह का साथ दिया। मामले की जांच CBI कर रही है और उसने भी जमानत का विरोध किया था। कोर्ट ने जांच से जुड़ी अहम रिपोर्ट आने तक उन्हें जेल में रखने का फैसला किया है।
दरअसल मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने 26 अक्टूबर को दिए आदेश में कहा कि ट्विशा की मौत से पहले की परिस्थितियों को अभी पूरी तरह समझना बाकी है। मृतका ने अपनी मां और ननद को WhatsApp पर कई संदेश भेजे थे। इन संदेशों में उसने पति के व्यवहार, बच्चे के पितृत्व पर सवाल उठाने और गर्भपात को लेकर लगाए गए आरोपों से परेशान होने की बात कही थी। कोर्ट ने इन बातचीत को मामले की जांच के लिए अहम माना है।
मानसिक रूप से परेशान होने की बात कही थी
आदेश के मुताबिक 9 मई को भेजे गए संदेशों में ट्विशा ने मानसिक रूप से परेशान होने और आत्महत्या जैसे विचार आने की बात कही थी। 11 मई को भी उसने ससुराल में घुटन और प्रताड़ना की शिकायत की थी। 12 मई को उसने अपनी मां से 3 हजार रुपए मंगाकर नसीराबाद लौटने के लिए ट्रेन टिकट बुक किया था। उसने दांपत्य जीवन से जुड़ी परेशानियों के समाधान के लिए डॉक्टर के पास जाने की बात भी कही थी।
वहीं इसी रात करीब 9:20 बजे उसने अपनी ननद को फोन किया और रोते हुए पति के आक्रामक व्यवहार की शिकायत की। इसके करीब 16 मिनट बाद उसने संदेश भेजकर कहा कि उसे शांति से मरने दिया जाए। इसके बाद भी उसने अपने माता-पिता से फोन पर बात की थी। हाईकोर्ट ने इन सभी घटनाओं को एक साथ देखते हुए कहा कि मौत से पहले की परिस्थितियों और आरोपियों की भूमिका की आगे जांच जरूरी है।
CCTV फुटेज में क्या दिखा?
दरअसल हाईकोर्ट के आदेश में घर के CCTV फुटेज का भी जिक्र है। कोर्ट के मुताबिक रात करीब 10:23 बजे गिरिबाला सिंह पहली मंजिल से छत की ओर जाती दिखाई दीं। उनके पीछे समर्थ सिंह भी गया था। बाद में गिरिबाला सिंह घर का मुख्य दरवाजा खोलने नीचे आईं। फुटेज में समर्थ सिंह, उसके चचेरे भाई स्वराज सिंह और घरेलू सहायक प्रमोद कुमार झारिया ट्विशा को सीढ़ियों से नीचे लाते दिखाई दिए। हालांकि CCTV रिकॉर्डर में मौजूद डेटा की प्रामाणिकता और उसमें रिकॉर्डिंग की निरंतरता की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। इसके लिए रिकॉर्डर को केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) भेजा गया है। वहीं ट्विषा के आईफोन से डेटा निकालने की रिपोर्ट भी अभी नहीं मिली है। कोर्ट का मानना है कि इन दोनों रिपोर्ट से मामले से जुड़े अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। यदि रिकॉर्ड में किसी तरह का बदलाव मिलता है, तो जांच को आगे बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है।
जानिए हाई कोर्ट ने क्या कहा?
वहीं जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह के वकीलों ने दलील दी थी कि आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में आरोपी की मंशा साबित करना जरूरी है। केवल प्रताड़ना के आरोप के आधार पर इस अपराध को साबित नहीं माना जा सकता। इस पर कोर्ट ने कहा कि मंशा के सवाल को मामले की बाकी परिस्थितियों से अलग करके नहीं देखा जा सकता। मृतका की शिकायतें, WhatsApp बातचीत, CCTV फुटेज और आरोपियों की भूमिका की जांच अभी जारी है।
बता दें CBI ने भी गिरिबाला सिंह की जमानत का विरोध किया था। इससे पहले भोपाल की निचली अदालत से मिली उनकी अग्रिम जमानत को हाईकोर्ट रद्द कर चुका है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक गिरिबाला सिंह 2 जून 2026 से जेल में हैं। वहीं ताजा आदेश के बाद फिलहाल उनकी रिहाई का रास्ता बंद हो गया है।
वंदना झां, जबलपुर
4 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

