मध्यप्रदेश में चीतों का कुनबा बढ़ाने की तैयारी के तहत अब गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में कूनो से एक और मादा चीता लाने पर विचार किया जा रहा है। दरअसल वन विभाग करीब छह साल की निर्वा और बोत्सवाना मूल की करीब तीन साल की मादा चीता में से किसी एक को गांधी सागर भेजने की तैयारी कर रहा है। 18 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक देश में चीतों की संख्या 56 हो चुकी है जिनमें 53 कूनो और तीन गांधी सागर में हैं।
दरअसल गांधी सागर में अभी तीन चीते मौजूद हैं। इनमें दक्षिण अफ्रीका से लाए गए नर चीते प्रभास और पावक को अप्रैल 2025 में अभयारण्य में छोड़ा गया था। इसके बाद सितंबर 2025 में कूनो से मादा चीता धीरा को गांधी सागर लाया गया। अब यहां चौथा चीता लाने की तैयारी है और वन विभाग की ओर से एक मादा चीता के नाम पर विचार किया जा रहा है।
CM डॉ. मोहन यादव के हाथों नई मादा चीता को छोड़ा जाएगा
वहीं अधिकारियों के मुताबिक कूनो से निर्वा या बोत्सवाना मूल की करीब तीन साल की किसी मादा चीता को गांधी सागर भेजा जा सकता है। अंतिम फैसला संबंधित स्तर पर लिया जाना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हाथों नई मादा चीता को गांधी सागर में छोड़े जाने की तैयारी बताई गई है। चीतों को रखने के लिए गांधी सागर में करीब 64 वर्ग किलोमीटर का सुरक्षित इलाका तैयार किया गया है। इस क्षेत्र में बाड़े, निगरानी और चीतों की सुरक्षा से जुड़े जरूरी इंतजाम किए गए हैं। यहां पहले से मौजूद चीतों की निगरानी भी वन विभाग की टीम कर रही है।
प्रोजेक्ट चीता में गांधी सागर की बढ़ी भूमिका
दरअसल गांधी सागर को कूनो के बाद देश में चीतों के लिए दूसरे प्रमुख ठिकाने के तौर पर विकसित करने की प्रक्रिया अप्रैल 2025 में शुरू हुई थी। इसी दौरान दक्षिण अफ्रीका से लाए गए प्रभास और पावक को यहां छोड़ा गया। बाद में कूनो की मादा धीरा को भी गांधी सागर भेजा गया। अब एक और मादा के आने से यहां चीतों की संख्या चार हो जाएगी। प्रोजेक्ट चीता के तहत भारत में चीतों को अलग-अलग उपयुक्त इलाकों में बसाने पर काम किया जा रहा है। इसका मकसद केवल एक ही इलाके में चीतों को रखने के बजाय उनके लिए दूसरे सुरक्षित ठिकाने तैयार करना भी है। गांधी सागर इसी योजना का हिस्सा है। जानकारी के मुताबिक 18 सितंबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार भारत में कुल 56 चीते हैं। इनमें 53 चीते कूनो नेशनल पार्क में और तीन गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में हैं। नई मादा चीता के आने के बाद गांधी सागर में यह संख्या चार हो जाएगी।






