VIDEO: सिंधिया की फिसली जुबान, ‘हाथ के पंजे का बटन दबाने की कर दी अपील’

VIDEO: सिंधिया की फिसली जुबान, ‘हाथ के पंजे का बटन दबाने की कर दी अपील’

डबरा, सलिल श्रीवास्तव| कांग्रेस (Congress) छोड़ भाजपा (BJP) में आये ज्योतरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) चुनावी मंच से लगातार कांग्रेस पर हमला बोल रहे हैं| ऐसे में एक बार फिर उनकी जुबान पर कांग्रेस का नाम आ गया, लेकिन इस बार वो कांग्रेस के हाथ के पंजे की बटन दबाने की अपील कर बैठे| डबरा में बीजेपी प्रत्याशी इमरती देवी (Imarti Devi) के समर्थन सभा करने पहुंचे सिंधिया की मंच से बोलते हुए जुबान फिसल गई| कांग्रेस ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा दिल की बात जुबां पर आ ही जाती है|

दरअसल, सिंधिया शनिवार को बीजेपी प्रत्याशी इमरती देवी के समर्थन में सभा को सम्बोधित कर रहे थे| इस दौरान उनकी जुबान फिसल गई| सिंधिया ने कहा कि तीन तारीख को हाथ के पंजे का बटन दबाना है। जब उनको गलती का अहसास हुआ तो तुरंत उन्होंने अपनी बात संभाली और कहा कि कमल के फूल वाला बटन दबेगा और कांग्रेस के पंजे वाले बटन को बोरी बिस्तर बांधकर यहां से रवाना करेंगे| सिंधिया के पंजे वाली बात सुनकर लोग ठहाका लगाने लगे|

कांग्रेस ने इस पर चुटकी ली है| प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी (ग्वालियर-चम्बल संभाग) के.के. मिश्रा ने ट्वीट कर लिखा- दिल की बात जुबां पर आ ही जाती है,अभी डबरा में “उनकी इमरती” के समर्थन में हुई सभा में “श्रीअन्त” बोल गए 3 तारीख़ को “हाथ के पंजे” का बटन दबाना है,उन्हें भी अहसास है कि पंजा व कमलनाथ जी दोनों ही वापस आ रहे हैं,आप और मामू….?

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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