
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विपक्षी दलों की ओर से जीएसटी सुधारों की आलोचना पर तीखा प्रहार किया। सोमवार को लागू हुए जीएसटी सुधारों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यूपीए शासनकाल में उद्योगों और एमएसएमई पर टैक्स टेरर था। नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वैष्णव ने बताया कि आरके पुरम के बाजार में लोगों ने जीएसटी सुधारों पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि कई करों के जाल को जीएसटी में एकीकृत किया गया, जिसके बाद अगली पीढ़ी के सुधार लाए गए।
वैष्णव ने यूपीए सरकार की तुलना में जीएसटी के तहत करों में कमी को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि सीमेंट पर यूपीए के समय 30 प्रतिशत कर था, जो अब 18 प्रतिशत है। सैनिटरी पैड पर 13 प्रतिशत कर को शून्य कर दिया गया है और जूतों पर कर 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि रेफ्रिजरेटर, डिटर्जेंट, शैंपू और कॉफी जैसे घरेलू सामानों पर यूपीए के समय 30 प्रतिशत कर था, जो अब 5 से 18 प्रतिशत के बीच है।
किसानों के लिए भी राहत का जिक्र
केंद्रीय मंत्री ने किसानों के लिए भी राहत का जिक्र किया, यह बताते हुए कि उर्वरक और यूरिया पर 12 प्रतिशत कर को घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है। उन्होंने कहा कि रेफ्रिजरेटर और टेलीविजन जैसी चीजें अब विलासिता की वस्तुएं नहीं हैं और इन पर कर को काफी कम किया गया है। वैष्णव ने इन सुधारों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री का आभार व्यक्त किया।
विपक्ष की आलोचना पर पलटवार
विपक्ष की आलोचना पर पलटवार करते हुए अश्विनी वैष्णव ने कांग्रेस पर निशाना साधा, जो जीएसटी सुधारों को सीमित बता रही थी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि ये सुधार एमएसएमई क्षेत्र की प्रक्रियात्मक जटिलताओं को कम करने में नाकाम रहे हैं। वहीं, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने केंद्र पर गरीब और मध्यम वर्ग को लूटने का आरोप लगाया। वैष्णव ने इन आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि यूपीए के समय केवल बातें होती थीं, काम नहीं।
