पश्चिम बंगाल: सीएम शुभेंदु अधिकारी की हुमायूं कबीर को विधानसभा में दो टूक चेतावनी, बोले- राज्य सरकार अब गुंडाराज को नहीं करेगी बर्दाश्त

पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नवदा के विधायक हुमायूं कबीर को उनके भड़काऊ भाषणों पर सख्त चेतावनी दी और कानूनी कार्रवाई के संकेत दिए।
Shubhendu Adhikari

पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को उस वक्त बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में नवदा के विधायक हुमायूं कबीर को खुली चेतावनी दी। अधिकारी ने कबीर पर भड़काऊ भाषण देने और राज्य में अराजकता फैलाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि विधायक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पूर्व विधायक सौकत मोल्ला का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सौकत मोल्ला ने व्हाट्सएप या फोन पर माफी मांगी थी, लेकिन मैंने उन्हें माफ करने से इनकार कर दिया। अधिकारी ने जोर देकर कहा कि नवदा के इस विधायक (हुमायूं कबीर) को भी बख्शा नहीं जाएगा।

विधानसभा सत्र में बोलते हुए, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हुमायूं कबीर के दो विवादित भाषणों के कुछ हिस्सों को हू-ब-हू पढ़कर सुनाया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि राज्य सरकार अब किसी भी कीमत पर गुंडाराज को बर्दाश्त नहीं करेगी। अधिकारी ने आरोप लगाया कि नवदा के विधायक का एक खास एजेंडा है। उन्होंने कहा कि कबीर मुख्यमंत्री तृणमूल से होने और खुद उपमुख्यमंत्री बनने की बात कहते हैं। मुख्यमंत्री ने आगे जोड़ा कि हुमायूं कबीर अपने बेटे को चुनाव जिताने के लिए यह सब कह रहे हैं।

हुमायूं कबीर के बयानों पर सीएम शुभेंदु अधिकारी का तीखा पलटवार

हुमायूं कबीर के हालिया बयानों पर तीखा हमला करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने एक अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा, ‘इस पर ध्यान से सोचें- यह उनका आखिरी भाषण हो सकता है।’ इस मुद्दे को लेकर दिन में पहले विधानसभा में भारी हंगामा भी हुआ था। बीजेपी विधायकों ने हुमायूं कबीर के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कबीर पर मुख्यमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने और राज्य में हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। नागरकाटा के बीजेपी विधायक पुना भेंगरा ने सबसे पहले इस मुद्दे पर स्पीकर का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद, नारायणगढ़ के विधायक रामप्रसाद गिरी और कई अन्य बीजेपी विधायकों ने नवदा विधायक के खिलाफ नारे लिखे पोस्टर दिखाए और सदन के अंदर विरोध जताया। जैसे ही मामला गरमाया, संसदीय मामलों के मंत्री शंकर घोष ने विधानसभा को सूचित किया कि मुख्यमंत्री को पूरे मामले की जानकारी है और वह सत्र में बाद में इस पर एक बयान जारी करेंगे।

26 जून के भाषण का सीएम अधिकारी ने विधानसभा में जिक्र

पहली घटना का जिक्र करते हुए, शुभेंदु अधिकारी ने 26 जून को रेजिनगर के काशीपुर में पार्टी की एक बैठक में हुमायूं कबीर के दिए भाषण का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कबीर ने बीजेपी विधायक अनामिका घोष और मुर्शिदाबाद में पार्टी के बढ़ते प्रभाव पर हमला किया था। उन्होंने अनामिका घोष को सीधी चेतावनी भी दी थी। उस भाषण में, हुमायूं कबीर ने कथित तौर पर कहा था कि अगर वह मुसलमानों के साथ मैदान में उतरे, तो बीजेपी समर्थकों को इतनी बुरी तरह पीटा जाएगा कि पार्टी का झंडा उठाने वाला कोई नहीं बचेगा। उन्होंने कथित तौर पर जेल की क्षमता की परवाह किए बिना लाखों लोगों को सड़कों पर लाने की धमकी भी दी थी। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी इशारा किया था कि अगर गुस्सा बढ़ा तो न तो पुलिस अधीक्षक और न ही मुख्यमंत्री को कोई फर्क पड़ेगा।

मुख्यमंत्री ने 8 जून को शक्तिपुर के दुआरा घाट में हुई दूसरी घटना का भी उल्लेख किया। इस घटना में हुमायूं कबीर ने कथित तौर पर अपने भतीजे की गिरफ्तारी को लेकर एक स्थानीय पुलिस स्टेशन अधिकारी के खिलाफ गुस्से वाली और आपत्तिजनक बातें कही थीं। अधिकारी के अनुसार, विधायक ने 10,000 समर्थकों के साथ पुलिस स्टेशन घेरने और अधिकारी को कॉलर पकड़कर बाहर खींचने की धमकी दी थी।

हुमायूं कबीर के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज होने का दावा

दोनों बयानों को पढ़ने के बाद, शुभेंदु अधिकारी ने सख्त लहजे में कहा, ‘बस बहुत हो गया। ऐसे लोगों को सबक सिखाने का समय आ गया है।’ उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘मैं आपको साफ-साफ बता दूं, ममता बनर्जी अब मुख्यमंत्री नहीं हैं। आपके पास एक कमजोर मुख्यमंत्री थी और सालों तक आपने जो चाहा कहा और किया। ऐसा अब और नहीं चलेगा।’ मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि हुमायूं कबीर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के कई नियमों के तहत दो विशिष्ट एफआईआर पहले ही दर्ज की जा चुकी हैं। शुभेंदु अधिकारी ने कबीर के कथित व्यवहार के पीछे एक राजनीतिक मकसद भी बताया। उनके अनुसार, विधायक भरतपुर, रेजिनगर और नवदा में चुनी हुई पंचायतों को तोड़ने और उन्हें राजनीतिक रूप से प्रभावित करने की कोशिशों में नाकाम रहे। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि अगले दो से तीन महीनों में रेजिनगर में उपचुनाव होने की संभावना है, और कबीर अपने बेटे के पक्ष में इलाके के मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘उस इलाके के लगभग 72 प्रतिशत मुस्लिम वोटरों को बांटने के लिए खतरनाक खेल खेला जा रहा है।’

शुभेंदु अधिकारी की कबीर को चेतावनी

पहले कानून तोड़ने वाले कई प्रभावशाली बाहुबलियों के अंजाम को याद दिलाते हुए, शुभेंदु अधिकारी ने कबीर को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें ‘बोलने से पहले 25 बार सोचना चाहिए।’ किसी का सीधे नाम लिए बिना, उन्होंने संदेशखाली, कैनिंग और फलता के नेताओं का जिक्र किया। अधिकारी ने दावा किया कि जिन्होंने कभी राजनीतिक दबदबा दिखाया था, उन्हें आखिरकार कानूनी नतीजों का सामना करना पड़ा। अपना बयान समाप्त करते हुए, मुख्यमंत्री ने विधानसभा से आखिरी और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा, ‘भारत का संविधान और कानून ही आखिरी फैसला है। मैं अगले हफ्ते मुर्शिदाबाद जा रहा हूं और वहां कानून का राज स्थापित करूंगा। जिन्होंने आपको बुलाया है, उनसे पहले निपटा जाएगा, और फिर मैं आपके पास आऊंगा।’

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