मराठा आरक्षण का मुद्दा गरमाया, कांग्रेस बोली- इसे सुलझाने की जिम्मेदारी महायुति पर, तुरंत कार्रवाई हो

कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि आंदोलनकारियों को भोजन, पानी और आश्रय की कमी का सामना करना पड़ रहा है और सरकार को उनकी स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
मराठा आरक्षण का मुद्दा गरमाया, कांग्रेस बोली- इसे सुलझाने की जिम्मेदारी महायुति पर, तुरंत कार्रवाई हो

कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने रविवार को कहा कि मराठा आरक्षण आंदोलन का तत्काल समाधान निकालने की जिम्मेदारी महायुति सरकार की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को मनोज जरांगे के नेतृत्व वाले मराठा आरक्षण आंदोलन की जानकारी पहले से थी, लेकिन कैबिनेट कमिटी के गठन में देरी की गई। जारंगे मुंबई में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं, जिसमें मराठाओं के लिए 10% आरक्षण और उन्हें कुंभी के रूप में मान्यता देने की मांग की जा रही है, ताकि वे सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण के पात्र हो सकें।

सावंत ने कहा कि जनवरी 2024 में वाशी में जरांगे के नेतृत्व वाले आंदोलन के दौरान महायुति सरकार ने आश्वासन दिए थे और गुलाल उछालकर उत्सव मनाया था, लेकिन अब ताजा आंदोलन से साफ है कि सरकार ने अपना वादा पूरा नहीं किया। उन्होंने कहा कि मराठा समुदाय को ठगा गया है और मुंबई में आंदोलनकारियों के पहुंचने की जिम्मेदारी सरकार की है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने जल्दी कदम नहीं उठाए, तो देश की वित्तीय राजधानी मुंबई ठप हो सकती है।

आंदोलनकारियों को भोजन-पानी

कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि आंदोलनकारियों को भोजन, पानी और आश्रय की कमी का सामना करना पड़ रहा है और सरकार को उनकी स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने जारंगे की सेहत को भी सरकार की जिम्मेदारी बताया। सावंत ने आरोप लगाया कि सरकार ने उप-समिति की बैठक के बाद अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है और इस मुद्दे को गंभीरता से हल करने में कोई रुचि नहीं दिखाई है।

सरकार असंवेदनशील है क्या

सचिन सावंत ने कहा कि सरकार या तो असंवेदनशील है या इस मुद्दे को बातचीत से हल करने में पूरी तरह अक्षम है। सावंत ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पद को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन में आंतरिक कलह जनता को परेशान कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि मुंबई और देश को होने वाला कोई भी नुकसान महायुति सरकार की जिम्मेदारी होगा।

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