Budget 2021 : बजट में किसानों को मिल सकता है बड़ा तोहफा

Budget 2021 : बजट में किसानों को मिल सकता है बड़ा तोहफा

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट| वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance) 1 फरवरी, सोमवार को संसद के पटल पर आम बजट (Budget 2021) पेश करने वाली है| कोरोना काल में बिगड़े हालातों के बाद सोमवार को पेश होने वाले बजट से आम आदमी, किसान, उद्योगपतियों से लेकर टैक्सपेयर्स तक सभी को कई उम्मीदें हैं| जानकारों का मानना है कि बजट में किसानों (Farmers) को लेकर बड़े ऐलान होंगे|

कृषि कानूनों के विरोध को लेकर चल रहे किसान आंदोलन के बीच सरकार बजट में किसानों को बड़ा तोहफा दे सकती है| केंद्र सरकार किसान क्रेडिट कार्ड की निर्धारित लोन की लिमिट को बढ़ा सकती है। सरकार किसानों के लिए कई स्कीम चला रही है| किसानों को साहूकारों और सूदखोरों के चंगुल में फंसने से बचाने के लिए और खेती के कार्य के लिए सस्ती दर ऋण उपलब्ध कराने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड देती है। किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए किसान को ऋण दिया जाता है।

सरकार इसकी लिमिट बढ़ाकर किसानों को खुश कर सकती है| किसान क्रेडिट कार्ड पर किसानों को बहुत ही कम ब्याज पर कर्ज आसानी से मिल जाता है| किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए किसानों, पशुपालक और मछलीपालकों को कई तरह के लाभ मिलते हैं|

इसके अलावा भी किसानों के लिए बजट में ख़ास जगह होगी| माना जा रहा है कि केंद्र की मोदी सरकार वित्तीय वर्ष 2021-22 के बजट में कृषि क्षेत्र में लाभ बढ़ाने के लिए कई अहम ऐलान कर सकती है| पीएम किसान सम्मान निधि योजना की राशि भी बढ़ाई जा सकती है|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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