इन कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर, जल्द बढ़ेगा मानदेय! परिषद ने शासन को भेजा प्रस्ताव, जानें कितनी बढ़कर मिलेगी राशि?

इससे पहले ग्राम चौकीदारों और प्रहरियों का मानदेय 1200 रुपए था, जिसे तीरथ सिंह रावत की सरकार ने 2 हजार रुपए किया गया था।अब अगर राज्य सरकार ने मानदेय बढाया तो यह डबल हो जाएगा।
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Honorarium hike 2024 : उत्तराखंड के चौकीदारों और ग्राम प्रहरियों के लिए अच्छी खबर है। राजस्व परिषद ने उत्तराखंड शासन को कई जिलों में तैनात ग्राम प्रहरियों और ग्राम चौकीदारों का मानदेय बढाने की फिर सिफारिश की है। राजस्व परिषद के आयुक्त और सचिव ने प्रमुख सचिव राजस्व को एक बार फिर प्रस्ताव भेजकर उस पर विचार करने का अनुरोध किया है।

राजस्व परिषद ने भेजा प्रस्ताव

जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड पुलिस विभाग के तहत ग्राम चौकीदारों और राजस्व विभाग में ग्राम प्रहरियों की तैनाती की व्यवस्था है। वर्तमान में करीब सात हजार चौकादारों है, जिसमें 1800 से अधिक ग्राम प्रहरी हैं, जो लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे है। लोकसभा चुनाव से पहले जनवरी में राजस्व परिषद ने एक प्रस्ताव भेजा था, जिसमें ग्राम चौकीदारों और ग्राम प्रहरियों का मानदेय 2000 रुपए बढाने की मांग की गई थी लेकिन इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया।

आखिरी बार 2021 में बढ़ा था मानदेय

अब लोकसभा चुनाव की वोटिंग के बीच राजस्व परिषद के आयुक्त और सचिव ने प्रमुख सचिव राजस्व को एक बार फिर प्रस्ताव भेजकर उस पर विचार करने का अनुरोध किया है और मानदेय 4000 रुपए प्रति माह करने की मांग की है।बता दे कि इससे पहले ग्राम चौकीदारों और प्रहरियों का मानदेय 1200 रुपए था, जिसे तीरथ सिंह रावत की सरकार ने 2 हजार रुपए किया गया था। अगर इनका मानदेय दोगुना हुआ तो राज्य पर करीब 5 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार आएगा।

कौन है ग्राम प्रहरी और चौकीदार

बता दे कि प्रदेश के तमाम गांव में विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी देने या सूचनाएं पहुंचाने समेत गांव की चौकीदारी का जिम्मा ग्राम प्रहरी और ग्राम चौकीदार को दिया गया है। राज्य भर में इनकी संख्या करीब 7000 है, जिसमें करीब 2100 ग्राम चौकीदार भी शामिल हैं। फिलहाल इन्हें 2 हजार रुपए मानदेय दिया जाता है जिसे 4000 रुपए किए जाने की मांग की गई है।

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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani →
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