पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा झटका, तेलंगाना हाईकोर्ट के अग्रिम जमानत के फैसले पर लगाई रोक

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि पवन खेड़ा की याचिका में इस बात का कोई जिक्र नहीं था कि तेलंगाना में यह अधिकार क्षेत्र कैसे बनता है। तुषार मेहता ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट इस तथ्य को नजरअंदाज कर गया कि इनमें से एक अपराध के लिए अधिकतम 10 साल की जेल की सजा का प्रावधान है।
Pawan Khera relief from Supreme Court

Pawan Khera relief from Supreme Court

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को देश की सर्वोच्च अदालत से तगड़ा झटका लगा है, अदालत ने तेलंगाना हाई कोर्ट के अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी है, तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ असम सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची है, हाई कोर्ट ने पवन खेड़ा को एक सप्ताह की अंतरिम अग्रिम जमानत दी है, जिसपर अब स्टे हो गया है, सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा सहित तीन लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, मामले की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी।

दर असल ये मामला पवन खेड़ा के खिलाफ असम पुलिस द्वारा दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है,  खेड़ा के खिलाफ असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां ने पुलिस में मामला दर्ज कराया है, कांग्रेस के मीडिया विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने उन पर 5 अप्रैल को तीन अलग अलग देशों के पासपोर्ट रखने के गंभीर आरोप लगाये थे, एफआईआर के बाद असम पुलिस पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर गई थी लेकिन वे वहां नहीं मिले, पवन खेड़ा ने तेलंगाना हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी जिपर अदालत ने उन्हें 10 अप्रैल को एक सप्ताह की अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी थी।

मामला असम का एफआईआर असम में, जमानत तेलंगाना से क्यों ? 

सुप्रीम कोर्ट में असम सरकार की तरफ से भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए , उन्होंने जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच में सुनवाई के दौरान तर्क दिया कि जब घटना असम में हुई, असम पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है तो तेलंगाना हाईकोर्ट ने अंतरिम अग्रिम जमानत क्यों दी? तुषार मेहता ने कहा कि आधार कार्ड के मुताबिक पवन खेड़ा की पत्नी भी दिल्ली में रहती है, फिर तेलंगाना में यह अधिकार क्षेत्र कैसे बनता है। 

ये प्रक्रिया का पूरी तरह दुरुपयोग है: तुषार मेहता 

तुषार मेहता ने कहा ये प्रक्रिया का पूरी तरह दुरुपयोग है, उन्होंने याचिका में ये नहीं बताया कि वे असम क्यों नहीं जा सकते? याचिका में पवन खेड़ा ने ये भी नहीं कहा कि उनकी पत्नी की हैदराबाद में कोई संपत्ति है, दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा हम तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश से हैरान हैं, अदालत ने पवन खेड़ा को मिली अंतरिम अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी, और पवन खेड़ा सहित तीन अन्य लोगों को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा, मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी ।

सुप्रीम कोर्ट ने ये कहा फैसले में 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल तेलंगाना हाईकोर्ट के अंतरिम अग्रिम जमानत आदेश पर रोक लगाई जाती है, पवन खेड़ा को गिरफ्तारी से कोई संरक्षण नहीं दिया जा सकता। हालाँकि अगर पवन खेड़ा असम की अदालत से अग्रिम जमानत की मांग करते हैं तो इस अदालत के आदेश का कोई असर नहीं होगा, यानी खेड़ा असम की अदालत में जमानत अर्जी दाखिल कर सकते हैं।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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