अनलॉक-5 की गाइडलाइन जारी, खुल सकेंगे सिनेमा हॉल, स्कूल को लेकर यह हुआ फैसला

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नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट| केंद्रीय गृह मंत्रालय (Home Ministry) ने अनलॉक-5 (Unlock-5) की गाइडलाइंस (Guidelines) जारी कर दी हैं| जिसमे पहले से अधिक रियायतें दी गई है| 15 अक्टूबर से देश में सिनेमा हॉल्स, थियेटर, मल्टीप्लेक्स (Cinema Halls & Multiplexes) 50 फीसदी क्षमता के साथ खुल जाएंगे| इसके लिए सूचना प्रसारण मंत्रालय विस्तृत रूप से दिशानिर्देश जारी करेगा|

गाइडलाइन के मुताबिक, खिलाड़ियों के लिए स्विमिंग पूल खोले जाएंगे| अनलॉक पांच में 15 अक्टूबर से सिनेमा हॉल, थियेटर खोले जा सकते हैं. हॉल में 50 फीसदी सीट पर ही दर्शक होंगे| सिनेमा हॉल, थियेटर्स, मल्टीप्लेक्स को लेकर जल्द ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय गाइडलाइंस जारी करेगा| राज्‍यों को स्‍कूल खोलने का अधिकार दिया गया है| .

गृह मंत्रालय की गाइडलाइन्स के अनुसार, स्कूलों और कोचिंग इंस्टीट्यूट्स को खोलने को लेकर 15 अक्टूबर के बाद राज्य सरकारें अपने हिसाब से फैसला कर सकेंगी। हालांकि, इस दौरान माता-पिता की सहमति की जरूरत होगी। इसके अलावा मनोरंजन पार्कों को भी 15 अक्टूबर से खोलने की इजाजत मिल गई है| गृह मंत्रालय ने मनोरंजन पार्क और इसी के जैसे दूसरी जगहों को भी खोलने की इजाजत दे दी है| बता दें कि स्कूल, सिनेमा हॉल मार्च महीने से बंद हैं| अब अनलॉक 5 में शर्तों के साथ इसे खोलने की अनुमति दी गई है|

बिजनेस टू बिजनेस (बी 2 बी) एग्जिबिशंस लगाईं जा सकेंगी| इनके लिए वाणिज्य विभाग एसओपी जारी करेगा| खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए उपयोग होने वाले स्विमिंग पूल को खोलने की अनुमति होगी, जिनके लिए खेल मंत्रालय एसओपी जारी करेगा|

सामाजिक, शैक्षणिक, खेल, मनोरंजन, सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक सम्मेलन और अन्य मंडलियों को कंटेनमेंट जोन के बाहर 100 व्यक्तियों की अधिकतम क्षमता के साथ मंजूरी होगी। अनलॉक 5 में सामाजिक, शैक्षणिक, खेल, मनोरंजन, सांस्कृतिक, धार्मिक , राजनीतिक कार्य और अन्य मंडलियों को पहले ही 100 व्यक्तियों के साथ अनुमति दी गई है। राज्य / केन्द्र शासित प्रदेश सरकारें केंद्र सरकार के पूर्व परामर्श के बिना, किसी भी स्थानीय लॉकडाउन (राज्य / जिला / उप-विभाजन / शहर / गाँव स्तर) को, ज़ोन के बाहर नहीं लगाएंगी। अंतर-राज्य और अंतर-राज्य आंदोलन पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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