Uttarakhand Glacier Flood : देवदूत बने जवान, लोगों को मौत के मुंह से ऐसे बचा लाये, वीडियो वायरल

Uttarakhand Glacier Flood : देवदूत बने जवान, लोगों को मौत के मुंह से ऐसे बचा लाये, वीडियो वायरल

देहरादून, डेस्क रिपोर्ट| उत्तराखंड (Uttarakhand) के चमोली जिले के जोशीमठ में एक ग्लेशियर के टूटने (Glacier Burst) अलकनंदा और इसकी सहायक नदियों में अचानक आई विकराल बाढ़ (Flood) के कारण हिमालय की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी तबाही मची है। बाढ़ के बाद कई लोग लापता हैं| इस बीच आईटीबीपी (ITBP) के जवानों ने देवदूत बनकर लोगों की जान बचाई|

आपदा के बाद एक सुरंग ध्वस्त हो गई| इसमें कई मजदूर फंस गए थे| हालांकि आईटीबीपी के जवानों ने चमत्कारिक ढंग से कई मीटर चौड़ी इस सुरंग से रस्सियों के जरिये कई मजदूरों को बाहर निकाल लिया| इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है| जिसमें ITBP के जवानों ने तपोवन डैम के नज़दीक फंसे सुरंग में लोगों को रेस्क्यू कर बाहर निकाला| वायरल वीडियो को लोग खूब पसंद कर रहे हैं| जवानों ने एक मजदूर को जैसे ही बाहर निकाला तो वो खुशी से नाचने लगता है| इतना ज्यादा खुश हो जाता है कि वो ज़मीन पर गिर जाता है| वीडियो में उस व्यक्ति की खुश जाहिर कर रही है कि वो मौत के मुँह से बाहर आ गया और जवानों ने उसकी जिंदगी बचाली| मजदूर ने जवानों को गले लगा लिया|

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बताया जा रहा है कि सुरंग से करीब 16 लोगों को बाहर निकाला गया है| ग्लेशियर फटने के बाद इलाके में 100 के करीब लोग लापता बताए जाते हैं| कई लोगों के शव भी बरामद किये गए हैं| आईटीबीपी कर्मियों को राहत एवं बचाय कार्य में लगाया गया है| सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और अर्धसैनिक बलों को भी राहत एवं बचाव कार्य में लगाया गया है|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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