जनपद अध्यक्ष पर कार्रवाई नहीं होने से भड़के दिग्विजय सिंह, दी जनसुनवाई में आने की चेतावनी

दिग्विजय सिंह ने पूछा, यदि जनपद अध्यक्ष 50,000/- रुपये लेते रंगे हाथ पकड़ा गया है तो वह गिरफ्तार क्यों नहीं हुआ? अभी तक उसे पद से क्यों नहीं हटाया गया?"
Digvijaya Singh

Digvijaya Singh

नीमच जिले की जावद जनपद के अध्यक्ष और थड़ोद पंचायत के सरपंच और सचिव के भ्रष्टाचार के मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने को लेकर अब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने नीमच जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए सीधे कलेक्टर और एसपी को चेतावनी दी है।

दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है, “जिला कलेक्टर महोदय, यदि जनपद अध्यक्ष 50,000/- रुपये लेते रंगे हाथ पकड़ा गया है तो वह गिरफ्तार क्यों नहीं हुआ? अभी तक उसे पद से क्यों नहीं हटाया गया?” उन्होंने आगे सवाल किया कि जब सरपंच व सचिव भ्रष्टाचार की जांच में दोषी पाए गए हैं, तो उन्हें पंचायत अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार अपदस्थ क्यों नहीं किया गया। प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा है कि इन सवालों का उत्तर देना पड़ेगा, अन्यथा वे स्वयं नीमच आकर कलेक्टर की जनसुनवाई में बैठेंगे।

पंकज तिवारी दे चुके हैं नागरिकता त्यागपत्र 

जनसुनवाई में प्रशासन के रवैये को लेकर आक्रोश का यह पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व पंकज तिवारी ने भी इसी तरह के मामले में कड़ा रुख अपनाया था। पंकज तिवारी ने जनपद अध्यक्ष और सचिव पर कार्रवाई नहीं से नाराज होकर जनसुनवाई में पहुंचकर कलेक्टर को नागरिकता त्याग पत्र दे दिया था। तिवारी ने प्रशासन पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि जब रंगे हाथों पकड़े गए चोर को सजा के बजाय कुर्सी और सम्मान मिलता है, तो ऐसे सिस्टम में आम नागरिक बनकर रहने का कोई औचित्य नहीं है।

ज्ञापन में कांग्रेस नेता ने लगाये थे गंभीर आरोप 

26 मई मंगलवार को कलेक्टर को नागरिकता त्यागपत्र सौंपने वाले कांग्रेस नेता पंकज तिवारी ने अपने ज्ञापन और मीडिया से बातचीत में जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे उन्होंने आरोप लगाया था कि जावद जनपद के अध्यक्ष गोपाल चारण को लोकायुक्त ने तीन साल पहले रंगे हाथों पकड़ा था और उनके खिलाफ न्यायालय में चालान भी पेश किया जा चुका है वहीं थड़ोद पंचायत के सरपंच और सचिव द्वारा सरकारी राशि के गबन और आर्थिक अनियमिताओं की पुष्टि स्वयं कलेक्टर की जांच में हो चुकी है। लेकिन भ्रष्टाचार प्रमाणित होने के बावजूद पंचायत अधिनियम की धारा 39 और 40 के तहत दोषियों को पद से हटाने की कार्रवाई नहीं की जा रही है।

कांग्रेस नेता पंकज तिवारी ने आरोप लगाया कि जिला पंचायत CEO और कलेक्टर भारी राजनीतिक दबाव में हैं और फाइलों को दबाकर बैठे हैं, जिससे आम जनता का विश्वास लोकतांत्रिक व्यवस्था से उठ रहा है। अब इतने गंभीर मामले में दिग्विजय सिंह की सीधी चेतावनी और जनसुनवाई में आने के अल्टीमेटम के बाद देखना यह है कि जिला प्रशासन जावद  जनपद अध्यक्ष सहित अन्य दोषियों पर क्या कदम उठाता है?

Atul Saxena
लेखक के बारे में
Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
Follow Us :GoogleNews