Meteorite : उल्का पिंडों की बौछार देखने के लिए हो जाइए तैयार, नहीं पड़ेगी Telescope की जरूरत, जानें घटना की तारीख 

Meteorite : उल्का पिंडों की बौछार देखने के लिए हो जाइए तैयार, नहीं पड़ेगी Telescope की जरूरत, जानें घटना की तारीख 

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। जब भी हम खुले आसमान को देखते हैं, तो हमको लगता है कि काश कोई टूटता हुआ तारा यहां से गुजरता और हम अपनी विश मांगते। ऐसा माना जाता है कि टूटते हुए तारे को देखकर मांगी गई मुरादे पूरी होती है। टूटते हुए तारे जैसा ही सुंदर दृष्य उल्का पिंडों (Meteorite) के टूटने पर भी दिखाई देता है। जिसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि ये टूटते हुए तारे है। तो अब आप इस सुंदर दृष्य को देखने के लिए तैयार हो जाइए, क्योंकि 13 और 14 दिसंबर को आसमान में चमक के साथ उल्का पिंडों की बौछार (Meteor shower) देखने को मिलेगी। मिली जानकारी के अनुसार, यह मिथुन तारामंडल के पास अधिक दिखाई देती है, जिसके चलते इस घटना को ‘Geminids Meteor shower’ भी कहा जाता है।

जानें कब दिखेगा उल्का पिंडों का बौछार

रोनाल्ड रॉस साइंस क्लब माध्यमिक विद्यालय मोठापुरा के समन्वयक विज्ञान शिक्षक नरेंद्र कर्मा ने बताया कि उल्का पिंडों (Meteorite )के टूटने की घटना दिसंबर माह के पहले वीक से ही शुरू हो गयी है। जो 17 दिसंबर तक रहेगी, लेकिन 13 और 14 दिसंबर की मध्य रात्रि को यह अपने चरम सीमा पर रहेगा। बता दें कि शिक्षक शर्मा ने खगोल विज्ञान का प्रशिक्षण लिया है।

एस्टेरॉइड के कारण होती है ये घटना

शिक्षक नरेंद्र कर्मा ने जानकारी देते हुए कहा कि यह घटना एक क्षुद्र ग्रह (Asteroid) के कारण होती है। जिसका निर्माण चट्टानों से हुआ रहता है। शिक्षक कर्मा ने बताया कि यह एस्टेरॉइड हर 1.4 साल में सूर्य का चक्कर लगाता है और चक्कर लगाने के दौरान यह सूर्य के काफी नजदीक चला जाता है। जिसके कारण इसमें गर्मी उत्पन्न होती है और इसमें गैस जमा होने लगता है। इन्ही क्रियाओं के कारण यह अलग-अलग भागों में टूटने लगता है और यह एक पूंछ का निर्माण कर लेता है।

अधिक घर्षण से जलता है पिंड

जब एस्टेरॉइड की पूंछ धरती के हिस्से से होकर गुजरती है तो पूंछ में मौजूद कण पृथ्वी के वातावरण की ओर चलने लगती है। जो हम इंसानों को जेमिनी तारामंडल से चमकीली बौछारों की तरह पृथ्वी पर आती दिखाई देती है। इस घटना से ऐसा प्रतीत होता है कि तारे टूट रहे है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं रहता है, बल्कि यह एक उल्का पिंड (Meteorite)होता है। शिक्षक कर्मा ने बताया कि जब भी पृथ्वी के वातावरण में कोई पिंड आता है, तो वह पृथ्वी के वायुमंडल के साथ घर्षण करता है और इसी घर्षण के अधिक होने से उसमें जलन पैदा होती है।

शिक्षक कर्मा को ऐसे मिलती है जानकारी

शिक्षक कर्मा ने कहा कि आसमान में यह घटना उन्हें दिसंबर के पहले सप्ताह से ही दिख रही है। जिसकी जानकारी उन्हें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (Science and Technology Department), भारत सरकार के अंतर्गत स्वायत्त संस्था विज्ञान प्रसार से मिली है। इसके बारे में अधिक जानकारी पाने के लिए उन्होंने इग्नाइटेड माइंड्स विपनेट क्लब उत्तर प्रदेश के जरिए अंतरिक्ष से संबंधित अंतरराष्ट्रीय मेटियोर ऑर्गेनाइजेशन बेल्जियम से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि वह हर रोज अंतरिक्ष से संबंधित पत्र और पत्रिकाओं को पढ़ते है, जिनसे उन्हें काफी कुछ जानकारी मिलती है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews