कन्हैयालाल के परिजनों से मिले अशोक गहलोत, NIA पर साधा निशाना, बोले- ‘ओपन एंड शट केस में भी…’

कन्हैयालाल के परिजनों से मिले अशोक गहलोत, NIA पर साधा निशाना, बोले- ‘ओपन एंड शट केस में भी…’

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत रविवार को उदयपुर पहुंचे और स्वर्गीय कन्हैयालाल के परिजनों से मुलाकात की। गहलोत ने परिवार का हालचाल जाना और उन्हें भरोसा दिलाया कि कांग्रेस हमेशा उनके साथ खड़ी रहेगी। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) पर तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि इतने संवेदनशील और “ओपन एंड शट” मामले में भी अब तक न्याय नहीं मिल सका है। गहलोत के इस बयान ने राजनीति के गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

कांग्रेस सरकार की मदद का किया जिक्र

अशोक गहलोत ने कन्हैयालाल हत्याकांड के बाद अपनी सरकार की ओर से की गई मदद का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने तत्काल एक्शन लेते हुए पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी थी। इसके अलावा मृतक के दोनों बेटों को सरकारी नौकरी भी प्रदान की गई थी, ताकि उनके जीवनयापन में कोई दिक्कत न हो। गहलोत ने याद दिलाया कि राज्य पुलिस ने महज चार घंटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार कर अपनी जिम्मेदारी निभाई थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा न्याय और इंसाफ की राजनीति की है।

NIA की धीमी जांच पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने केंद्र सरकार और NIA पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इस मामले को तीन साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक अपराधियों को अदालत से सजा नहीं दिलाई जा सकी है। गहलोत ने कहा, “यह केस ओपन एंड शट था, इसमें ज्यादा समय नहीं लगना चाहिए था। लेकिन NIA की लापरवाही और सुस्ती के कारण न्याय में देरी हो रही है। परिवार भी इस देरी से दुखी और निराश है।” उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह इस मामले को गंभीरता से ले और जल्द से जल्द सजा दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

क्या था उदयपुर का मामला?

गौरतलब है कि 2022 में उदयपुर के दर्जी कन्हैयालाल की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। इस वारदात ने पूरे देश को हिला दिया था क्योंकि आरोपियों ने हत्या का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था। घटना के बाद राज्य सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे शहर में शांति व्यवस्था कायम की और आरोपियों को गिरफ्तार किया। बाद में जांच को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दिया गया। हालांकि तीन साल बीतने के बाद भी न्याय न मिलना अब बड़ा सवाल बन गया है।

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