SI भर्ती परीक्षा पर सियासी ‘महाभारत’! हनुमान बेनीवाल ने किरोड़ीलाल मीणा को बताया ‘बिकाऊ’, मचा हड़कंप।

SI भर्ती परीक्षा पर सियासी ‘महाभारत’! हनुमान बेनीवाल ने किरोड़ीलाल मीणा को बताया ‘बिकाऊ’, मचा हड़कंप।

राजस्थान हाईकोर्ट ने गुरुवार को पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा 2021 को रद्द कर दिया। इसके साथ ही उन सभी की नियुक्तियां भी रद्द हो गईं जिन्हें इस परीक्षा में पास होने के बाद नौकरी मिली थी। जस्टिस समीर जैन की सिंगल बेंच ने यह फैसला सुनाया। पेपर लीक मामले में लंबे समय से चल रही जांच के बाद कोर्ट ने माना कि भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं। इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि यह मामला 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले से ही एक बड़ा मुद्दा बना हुआ था।

लाइव डिबेट में भिड़े मंत्री और विपक्षी नेता

हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कैबिनेट मंत्री किरोड़ीलाल मीणा और RLP प्रमुख हनुमान बेनीवाल के बीच एक टीवी चैनल के लाइव डिबेट शो में तीखी बहस हो गई। बेनीवाल ने आरोप लगाया कि राजस्थान सरकार ने लंबे समय तक मामले को दबाने की कोशिश की, जबकि मीणा ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। बहस इतनी गरम हो गई कि दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर ‘बिकाऊ’ और ‘फर्जी आदमी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। यह टकराव इस बात का संकेत है कि मामला अभी भी राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बना हुआ है।

बीजेपी का रुख बदलने पर उठे सवाल

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव 2023 में बीजेपी ने पेपर लीक को अपना बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया था। उस समय विपक्ष में रहते हुए उसने भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की थी। लेकिन सत्ता में आने के बाद सरकार ने परीक्षा को रद्द करने का विरोध किया। अब कोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी पर सवाल उठ रहे हैं कि उसने अपने रुख में बदलाव क्यों किया। विपक्ष इसे सरकार की विफलता बता रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए आगे की कार्यवाही की जाएगी।

पेपर लीक मामले में 80 से ज्यादा गिरफ्तारियां

RPSC ने सितंबर 2021 में 859 पदों के लिए एसआई भर्ती परीक्षा आयोजित की थी। इसके बाद फिजिकल टेस्ट और इंटरव्यू के बाद जून 2023 में फाइनल नियुक्तियां दी गईं। लेकिन पेपर लीक के आरोपों ने पूरी प्रक्रिया को सवालों के घेरे में डाल दिया। जांच में अनियमितताएं साबित हुईं और करीब 80 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें अभ्यर्थी और आयोग के सदस्य भी शामिल थे। कोर्ट के फैसले ने अब इस भर्ती को पूरी तरह निरस्त कर दिया है और राज्य सरकार को नई भर्ती प्रक्रिया पर विचार करना होगा।

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