जयपुर के निजी अस्पताल पर शव देने के बदले पैसे वसूलने का आरोप, मंत्री किरोड़ीलाल ने दिया बयान

जयपुर के एक निजी अस्पताल में 25 वर्षीय विक्रम मीणा की मौत के बाद परिजनों से 8.38 लाख वसूले जाने और बॉडी रोकने का विवाद सामने आया। परिजनों ने नाराज होकर कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा से संपर्क किया और मदद की गुहार लगाई।
जयपुर के निजी अस्पताल पर शव देने के बदले पैसे वसूलने का आरोप, मंत्री किरोड़ीलाल ने दिया बयान

राजधानी जयपुर के संतोकबा दुर्लभजी मेमोरियल हॉस्पिटल में रविवार को बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब एक मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर शव सौंपने के बदले लाखों रुपए वसूलने का गंभीर आरोप लगाया। घटना के बाद परिजन और ग्रामीणों ने अस्पताल परिसर में जमकर नारेबाजी की, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

मिली जानकारी के अनुसार, महुआ कमलेटी निवासी विक्रम मीणा (42) की सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद 13 अक्टूबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना के तहत इलाज करने से इनकार कर दिया और केवल कैश में भुगतान की मांग की। करीब 13 दिन इलाज के बाद शनिवार को विक्रम की मौत हो गई।

जयपुर के संतोकबा हॉस्पिटल में हंगामा

परिजनों ने बताया कि उन्होंने इलाज के दौरान 6 लाख 39 हजार रुपए पहले ही जमा कर दिए थे, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने 1 लाख 79 हजार रुपए अतिरिक्त मांगे और जब तक यह राशि नहीं दी गई, शव देने से इंकार कर दिया। इस परिजनों ने नाराज होकर कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा से संपर्क किया और मदद की गुहार लगाई।

मौके पर पहुंचे कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा

सूचना मिलने पर मंत्री रविवार सुबह करीब 10:30 बजे अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों और परिजनों से बात की। इस दौरान अस्पताल परिसर में भीड़ जमा हो गई और लोगों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर विरोध किया। बातचीत के बाद अस्पताल प्रशासन को शव सौंपने पर मजबूर होना पड़ा। मंत्री मीणा ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा, “यह शव के साथ खिलवाड़ है, पैसे के अभाव में किसी परिवार को मृतक के अंतिम संस्कार से वंचित रखना अमानवीय है।”

उन्होंने मौके पर मौजूद गांधीनगर थाना पुलिस को निर्देश दिया कि पीड़ित परिवार की शिकायत पर मामला दर्ज किया जाए। मंत्री मीणा ने कहा कि यह घटना केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि राज्य के स्वास्थ्य तंत्र की कमजोर मॉनिटरिंग और निजी अस्पतालों की मनमानी को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि वे इस घटना की लिखित शिकायत मुख्य सचिव को भेजेंगे और जरूरत पड़ने पर इसे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के संज्ञान में भी लाएंगे।

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