Rajasthan News: सामाजिक सुरक्षा पेंशनर्स के लिए जरुरी खबर, जल्दी करें ये काम वरना अटक सकती है राशि

भौतिक सत्यापन का कार्य 1 नवम्बर से 31 दिसम्बर की अवधि में संचालित किया जाता है। इस अवधि में वार्षिक सत्यापन नहीं करवाने वाले पेंशनर्स की पेंशन का भुगतान रोका जा सकता है। लेकिन सत्यापन के बाद रुकी हुई पेंशन फिर से चालू हो जाती है।
CM Bhajanlal Sharma

राजस्थान के सामाजिक न्याय एवं अधिकरिता मंत्री अविनाश गहलोत ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन पाने वाले सभी लाभार्थियों से वार्षिक सत्यापन शीघ्र करवाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी लाभार्थी की पेंशन बंद नहीं की गई है। सत्यापन के अभाव में रोकी गई है तो वार्षिक सत्यापन के बाद पुनः आरंभ हो जाएगी।

मंत्री गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सुशासन में विभाग की मंशा ज्यादा से ज्यादा पात्र पेंशनर्स को नियमित सामजिक सुरक्षा पेंशन उपलब्ध कराने की है। विभाग हर वो प्रक्रिया अपनाता है जिससे पेशनर्स को बिना किसी परेशानी के सुगमता से पेंशन मिलती रहे।

साल में एक बार वेरिफिकेशन जरूरी 

सामाजिक न्याय मंत्री ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के सभी लाभार्थियों को प्रति वर्ष स्वयं का भौतिक सत्यापन करवाना आवश्यक होता है। भौतिक सत्यापन का कार्य 1 नवम्बर से 31 दिसम्बर की अवधि में संचालित किया जाता है। इस अवधि में वार्षिक सत्यापन नहीं करवाने वाले पेंशनर्स की पेंशन का भुगतान रोका जा सकता है। लेकिन सत्यापन के बाद रुकी हुई पेंशन फिर से चालू हो जाती है।

लाभार्थी ऐसे कर सकते हैं भौतिक सत्यापन 

गहलोत ने कहा कि लाभार्थी घर से भी एन्ड्राइड मोबाइल पर Rajasthan social pension and Aadhar face RD एप के जरिए लाभार्थी के फेस रिकाग्निशन के आधार पर भौतिक सत्यापन कर सकते हैं। इसके अलावा लाभार्थी वार्षिक भौतिक सत्यापन के लिए ई-मित्र कियोस्क/ई-मित्र प्लस आदि केन्द्रों पर अंगुली की छाप (Finger Print Impression – Biometrics) से करवा सकते हैं। इसके लिए लाभार्थी को ई-मित्र कियोस्क पर निर्धारित शुल्क 50 रुपए एवं ई-मित्र प्लस पर 10 रुपए का भुगतान करना होता है। उन्होंने बताया कि यह सुविधा पूरी तरह से निःशुल्क है।

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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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