राजस्थान: सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर, अवधि बढ़ी, अब 10 जुलाई तक हो सकेंगे तबादले, आदेश जारी

भजनलाल सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के तबादलों पर लगी छूट की अवधि पांच दिन बढ़ाकर 10 जुलाई कर दिया है। बाकी की शर्तें पहले जैसी ही रहेंगी।
transfer 2026

transfer

राजस्थान के सरकारी कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। राज्य की भजनलाल सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों पर दी गई छूट की अवधि को 5 दिन और बढ़ाते हुए अब 10 जुलाई 2026 तक कर दिया है। 3 जुलाई 2026 को प्रशासनिक सुधार विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। पहले यह समयसीमा 5 जुलाई 2026 तक तय की गई थी।

​यह आदेश राज्य के सभी सरकारी विभागों, निगमों, बोर्डों और स्वायत्तशाषी संस्थाओं पर समान रूप से लागू होगा। हालांकि अब विभागीय मंत्रियों द्वारा तैयार की गई तबादला सूचियों को जारी होने से पहले मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। सीएमओ की हरी झंडी के बाद ही अंतिम सूची जारी की जा सकेगी।

खबर है कि 4 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिफाइनरी लोकार्पण कार्यक्रम सहित अन्य प्रशासनिक व्यस्तताओं के कारण कई विभागों में तबादलों की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई थी। वही राज्य के कई भाजपा विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी सरकार से तबादलों के लिए समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध किया था। इसके बाद अवधि बढ़ाने का फैसला लिया गया है।

शिक्षा विभाग के तृतीय श्रेणी वेतन श्रृंखला के अध्यापकों के तबादलों पर लगी रोक को आगामी आदेश तक यथावत रखा गया है। मानसून के दौरान मौसमी बीमारियों की आशंका को देखते हुए डॉक्टरों, नर्सिंग ऑफिसर, लैब टेक्नीशियन और स्वास्थ्य विभाग के अन्य कार्मिकों के तबादलों पर भी प्रतिबंध जारी रहेगा, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।

​तबादलों में इन्हें मिलेगी प्राथमिकता

तबादलों में एकल महिला, विधवा, परित्यक्ता, मेडिकल बोर्ड अथवा सक्षम स्तर द्वारा प्रमाणित असाध्य रोग (यथा कैंसर, मस्तिष्क, हृदय, फेफड़े, किडनी के गंभीर अथवा अन्य प्राण घातक रोग) से ग्रसित कार्मिक, दीर्घावधि सेवा, दिव्यांग कर्मियों तथा राजकीय सेवारत पति-पत्नी प्रकरणों को प्राथमिकता दी जाएगी।

  • ​एकल महिलाएं, विधवाएं और परित्यक्ता महिला कर्मचारी।
  • ​गंभीर या लालाज बीमारियों (जैसे कैंसर, हृदय, मस्तिष्क, फेफड़े या किडनी की
  • गंभीर बीमारी) से पीड़ित कर्मचारी, जिनका मेडिकल बोर्ड से प्रमाण पत्र हो।
  • ​दिव्यांग कर्मचारी और लंबे समय से दूरदराज के क्षेत्रों में सेवा दे रहे कार्मिक।
  • ​पति-पत्नी केस (स्पौस केस), जहां दोनों ही सरकारी सेवा में हों और एक ही स्थान पर आना चाहते हों।

Pooja Khodani
लेखक के बारे में
Pooja Khodani

12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani →
Follow Us :GoogleNews