नौकरी बचाने नेता की शरण में पहुंचा होमगार्ड, अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप

नौकरी बचाने नेता की शरण में पहुंचा होमगार्ड, अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप

रतलाम ।सुशील खरे।
अभी तक आपने देखा पड़ा और सुना होगा की कोई भी दुखी परेशान व्यक्ति पुलिस के पास जाता है पर रतलाम में आज कुछ इससे उल्टा ही नजारा देखने को मिला यहाँ पर कुछ पुलिस कर्मी सत्तारूढ़ पार्टी के जिलाध्यक्ष राजेश भरावा को घेरे खड़े थे और वो सब अपनी नौकरी बचने की गुहार लगा रहे थे ये सब थे नगर सैनिक

दरअसल मप्र में हाईकोर्ट के आदेश के बाबजूद भी नगर सेना के सेनिको को एक साल की जगह दस माह ही नौकरी पर रखा जा रहा है जिससे इनके सामने ार्थी और पारवारिक संकट शुरू हो गया इन लोगों ने सर्कार के साथ अपने बरिष्ठ अधिकारिओं पर भी वादा खिलाफी और दमनकारी नीति का आरोप लगाया इनका कहना है की हम लोगों को रोटेशन के तहत घर बिठा दिया जा रहा जिस पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश भरावा का कहना है की ये राज्य स्तरीय मुद्दा है में मुख्यमंत्री से बात करूंगा अब देखना है नगर की सुरक्षा करने बाली ये पुलिस अपने हक़ की लड़ाई कहाँ तक लड़ती है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews