
अश्विन मास के शुक्ल पक्ष को आने वाली एकादशी तिथि का काफी महत्व माना गया है। इसे पापांकुशा एकादशी (Papankusha Ekadashi) के नाम से पहचाना जाता है। इस दिन का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित किया गया है। इस व्रत का अत्यंत ही दुर्लभ और विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा कहा गया है कि इसके समान पुण्य कोई दूसरा व्रत नहीं देता।
हिंदू धर्म में वैसे भी एकादशी व्रत करने का काफी महत्व माना गया है। पापांकुशा एकादशी का व्रत जो व्यक्ति विधि विधान और नियमों के साथ करता है।उसे यमलोक में कठोर यातनाओं का सामना नहीं करना पड़ता। यह मृत व्यक्ति के समस्त पापों का नाश कर देता है और उसे मुक्ति का मार्ग दिखाता है। चलिए आपको इस व्रत की पूजन विधि, शुभ मुहूर्त और कुछ उपाय बता देते हैं।
व्रत का मुहूर्त (Papankusha Ekadashi)
पापांकुशा एकादशी पर ब्रह्म मुहूर्त के अलावा 11:46 से 12:10 तक अभिजीत मुहूर्त 2:08 2:55 तक विजय मुहूर्त 6:05 से 6:29 तक गोधूलि मुहूर्त है। रात को 10:56 से लेकर 12:30 तक अमृत कल रहेगा 6:15 तक सर्वार्थ सिद्धि योग और 6:15 तक रवि योग का शुभ संयोग रहने वाला है।
पूजन सामग्री
एकादशी व्रत पर पूजन के लिए विष्णु जी की मूर्ति अथवा चित्र, नारियल, पुष्, सुपारी, फल, लौंग, धूप, दीप,घी, पंचामृत, तुलसी दल, अक्षत मिठाई की आवश्यकता होगी।
पूजन विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ कपड़े धारण करें।
- अब आपके घर के मंदिर में दीप प्रज्ज्वलित करना है।
- सबसे पहले भगवान विष्णु का गंगाजल से अभिषेक करें।
- अब आपको विष्णु जी को पुष्प और तुलसी दल अर्पित करना होगा। माता लक्ष्मी की पूजन करना बिल्कुल ना भूलें।
- अगर व्रत कर सकते हैं तो जरूर करें।
- अब आपको भगवान की आरती कर उन्हें भोग लगाना है।
- इतना याद रखें कि भगवान को केवल सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। इसके साथ तुलसी दल रखना बिल्कुल ना भूलें। बिना तुलसी के भगवान विष्णु कभी भी भोग ग्रहण नहीं करते हैं।
व्रत का पारण कब करें
अगर आप पापांकुशा एकादशी का व्रत रखते हैं, तो 4 अक्टूबर को सुबह 6:30 बजे से 8:53 तक इसका पारण कर सकते हैं। पारण तिथि के दिन द्वादशी का समापन 5.09 मिनट पर हो जाएगा।
करें ये उपाय
एकादशी के दिन अगर आप श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो तुलसी के पौधे पर जल अर्पित करें। अब घी का दीपक जलाकर तुलसी मंत्र का 11 बार जाप करें और 11 परिक्रमा लगाएं। दरअसल, तुलसी के पौधे में माता लक्ष्मी का वास माना जाता है। ऐसे में इसकी पूजन करना शुभ माना गया है।
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