Shaniwar Ke Upay: शनिवार के दिन करें ये 10 उपाय, शनिदेव की होगी कृपा, बनेंगे बिगड़े काम

Shani Dev

Shaniwar Ke Upay : सनातन धर्म में शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित होता है। इस दिन विधि-विधान से शनिदेव की पूजा-उपासना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि देव को न्याय के देवता माना जाता है। उनकी पूजा करने से व्यक्ति की इच्छाएं पूर्ण होती है और जीवन में व्याप्त काल, कष्ट, दुख और संकट दूर हो जाते हैं। इसके साथ ही, जब किसी व्यक्ति को अपनी जन्म राशि के आधार पर साढ़े साती या शनि की ढैय्या का प्रभाव होता है तो शनिदेव की पूजा और उनकी उपासना उस प्रभाव को क्षीण करने में मदद करती है। इसलिए उन्हें हर कोई खुश करना चाहता है। तो चलिए आज हम आपको कुछ उपाए बताते हैं जिससे आप शनि देव को आसानी से प्रसन्न कर सकते हैं…

शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाए

  1. शनिदेव को खुश करने के लिए शनिवार के दिन तिल (सेसम सीड) का दान करें। आप तिल को किसी गरीब या यतियों को भी दे सकते हैं।
  2. शनिदेव के उपासना में नीलम का महत्वपूर्ण स्थान है। शनिवार के दिन आप नीलम की माला धारण कर सकते हैं या नीलम की अंगूठी पहन सकते हैं।
  3. “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः” यह मंत्र शनिदेव के लिए प्रभावशाली माना जाता है। आप शनिवार के दिन इस मंत्र का जाप कर सकते हैं, विशेष रूप से शनि की प्रभावित दशा में होने पर।
  4. शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए दान का महत्व बहुत उच्च होता है। आप गरीबों को अनाज, कपड़े, रुपये आदि दान कर सकते हैं।
  5. पीपल के पत्तों की माला बनाकर और उसे शनि मंदिर में अर्पित करके शनिदेव की प्रार्थना करने से आपकी संकटों और कोर्ट-कचहरी से संबंधित समस्याएं दूर हो सकती हैं।
  6. पीपल के पेड़ की परिक्रमा करने और कच्चे सूत के धागे को लपेटने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। परिक्रमा करते समय शनिदेव का ध्यान रखने के माध्यम से आपको मानसिक शांति और तरक्की मिलती है।
  7. धार्मिक परंपराओं में दांपत्य जीवन को सुखमय बनाने के लिए काला तिल का उपयोग किया जाता है। इसके लिए आप शनिवार के दिन थोड़ा सा काला तिल लेकर पीपल के पेड़ के पास चढ़ा सकते हैं। इसके बाद, पीपल की जड़ में पानी अर्पित करें। आप थोड़े से पानी को पीपल की जड़ में डाल सकते हैं और मन में शनिदेव की प्रार्थना कर सकते हैं। यह आपके दांपत्य जीवन की सुख-शांति और समृद्धि में सहायता करता है।
  8. शनिवार के दिन काला कोयला लेकर उसे बहते हुए जल में प्रवाहित करने का उपाय एक प्रसिद्ध परंपरा है जो कई लोगों द्वारा मान्यता प्राप्त है। इस उपाय को करने से नौकरी प्राप्ति के मामले में सफलता की संभावना हो सकती है और आमदनी में वृद्धि हो सकती है।
  9. पुष्प नक्षत्र के दौरान शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करने का यह उपाय आपके घर में सुख-समृद्धि ला सकते हैं।
  10. हनुमान चालीसा का पाठ शनिदेव को प्रसन्न करने और शनि की बाधाओं को समाप्त करने के लिए अचूक माना जाता है। हनुमान चालीसा के पाठ से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है और शनि के द्वारा उत्पन्न संकटों और कष्टों का निवारण होता है।

एक शुद्ध और स्थिर स्थान का चयन करें जहां आप शनिदेव की पूजा कर सकें। आप अपने घर के पूजा स्थान, मंदिर या शनि मंदिर में इस पूजा का आयोजन कर सकते हैं।

पूजा सामग्री

  • शनि देव की मूर्ति या फोटो
  • जल और गंगाजल
  • शनि देव की प्रिय चीजें जैसे तिल, उड़द दाल, काले रंग की सब्जियां, काली उड़द की दाल आदि
  • धूप, दीप, चंदन, कपूर, अगरबत्ती
  • पुष्प, फल, पानी, प्रशाद

पूजन विधि

  • पूजा करने से पहले नित्य पूजा का आयोजन करें, जिसमें आप अपनी नियमित पूजा का आयोजन करते हैं।
  • शनि देव की मूर्ति या फोटो को स्थानीयता के अनुसार स्थापित करें।
  • धूप, दीप, चंदन, कपूर, अगरबत्ती से पूजा का आरम्भ करें।
  • मन्त्रों का जाप करें

(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। MP Breaking News किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।)

Sanjucta Pandit
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सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit →
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