शीतला सप्तमी पर इस मुहूर्त में करें पूजा, जानें विधि, माता का प्रिय भोग और व्रत की कथा

जितने भी व्रत और त्योहार होते हैं उनका अपना धार्मिक महत्व है। आज हम आपको शीतला सप्तमी व्रत की कथा, पूजा विधि और भोग के बारे में बताते हैं।
Sheetala Saptami 2026

हिंदू धर्म में शीतला सप्तमी को त्यौहार की तरह मनाया जाता है। इस दिन माता शीतला को ठंडा भोजन अर्पित किया जाता है और इसी का सेवन भी किया जाता है। कुछ जगह इसे बासोड़ा के नाम से पहचाना जाता है। कहते हैं कि इस दिन की है पूजा से रोग घर से दूर रहते हैं।

सप्तमी को लेकर यह मान्यता है कि इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाना चाहिए और ना ही ताजा भोजन बनाना चाहिए। इस दिन एक दिन पहले बनाया गया खाना खाया जाता है। इस साल शीतला सप्तमी 10 मार्च को मनाई जाएगी। चलिए इस दिन की पूजा विधि, मुहूर्त और भोग के बारे में जान लेते हैं।

शीतला सप्तमी पूजा मुहूर्त

सप्तमी की तिथि की शुरुआत 9 मार्च 2026 को रात 11:27 से हो जाएगी। इसका समापन 11 मार्च की रात 1:54 पर होगा। इस हिसाब से 10 मार्च को शीतला सप्तमी मनाई जाएगी जिसकी पूजा का मुहूर्त सुबह 6:37 से शाम 6:26 तक रहेगा।

कैसे करें पूजा

  • इस दिन सुबह उठकर सबसे पहले ठंडे जल से स्नान करना चाहिए।
  • इसके बाद व्रत का संकल्प लें और विधि विधान से माता शीतला की पूजन करें।
  • माता को लगाए जाने वाला भोग आपको एक दिन पहले बना लेना होगा।
  • सच्चे मन से पूजा करने के बाद कथा जरूर सुने।
  • अब आपको माता की आरती करनी होगी और अगर रात्रि जागरण करते हैं तो अवश्य करें।

इन चीजों का लगाएं भोग

सप्तमी के दिन लगाया जाने वाला भोग एक दिन पहले तैयार किया जाता है। इसमें पूड़ी, बेसन के गट्टे, मीठे चावल, दही बड़े और गुजिया जैसी चीज शामिल होते हैं। कुछ लोग मीठे और तीखे भजिया का भोग भी लगाते हैं। एक दिन पहले बनाई गई इन चीजों का पूजा के बाद माता को भोग लगाया जाता है और दिन भर इसी का सेवन किया जाता है।

क्या है कथा

शीतला सप्तमी की एक प्रसिद्ध कथा है जिसके मुताबिक एक समय पर एक बूढ़ी अम्मा और उसकी दो बहुओं ने व्रत रखा था। उस दिन घर के सभी सदस्यों को बासी भोजन ग्रहण करना था इसलिए एक दिन पहले ही खाना बना लिया गया। अम्मा की बहुओं को कुछ समय पहले ही संतान हुई थी इसलिए बीमार होने के डर से उन्होंने बासा भोजन न खाकर अपने लिए ताजा भोजन बनाया और खा लिया। जब अम्मा ने उन्हें भोजन ग्रहण करने को कहा तो उन्होंने बहाना बनाकर टाल दिया। उनके इस कर्म से माता शीतला नाराज हो गई और दोनों बहुओं की संतान की मृत्यु हो गई। क्रोधित होकर बुढ़िया ने दोनों बहुओं को घर से बाहर निकाल दिया और वह अपने शिशुओं के शव को लेकर बरगद के पेड़ के नीचे जाकर बैठ गई। तभी वहां पर शीतला और ओरी नाम की दो बहनें आई जो अपने सिर की जूं से परेशान थी। दोनों बहुओं ने उनका सिर साफ किया जिससे उन्हें चैन मिला और दोनों ने उन्हें आशीष दिया कि तुम्हारी गोद हरी भरी हो जाए। इस पर दोनों बहुओं ने अपनी व्यथा सुनाई। शीतला ने उन्हें कहा कि पाप कर्म का दंड भुगतना पड़ता है, इतना सुनते ही दोनों ने पहचान लिया कि यह शीतला माता है। दोनों उनके चरणों में पड़कर क्षमा याचना करने लगी। माता को उन पर दया आ गई और उन्होंने मृत बालकों को जीवित कर दिया। इसके बाद दोनों खुशी-खुशी अपने गांव लौटी और इस चमत्कार को देखकर सभी हैरान हो गए। तभी से पूरे गांव में शीतला सप्तमी का व्रत रखा जाने लगा।

Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।

Diksha Bhanupriy
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"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy →
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