लोगों ने पुलिस पर बरसाए फूल, तालियां बजाकर किया अभिनंदन

लोगों ने पुलिस पर बरसाए फूल, तालियां बजाकर किया अभिनंदन

सतना/पुष्पराज सिंह बघेल

कोरोना से बचाव में लॉक डाउन में जहाँ कभी पुलिस का सख्त रुख देखने को मिला वहीं कई बार उनका करुणामयी अंदाज भी दिखा। लेकिन चाहे पुलिस सख्ती दिखाए या हमदर्दी, उनका उद्देश्य जनता की सुरक्षा ही है। ऐसे में सतना की गलियों में शाम को फ्लैग मार्च करने वाली खाकी का लोगों ने छत की बालकनी से पुष्प वर्षा और तालियों से स्वागत किया।

शहर की वो गलियां जो लॉकडाउन में सूनी हैं, शाम को यहां पुलिस का फ्लैग मार्च निकलता है। लॉकडाउन के दूसरे चरण के पहले दिन पुलिस वालों अलग रूप नजर आया जब उन्होने बुजुर्गों के चरण छूकर उनसे घर में रहने की अपील की। वहीं लोगों ने भी अपने कर्तव्य के पालन में  लगी पुलिस का स्वागत फूलों की बारिश और तालियों से किया। फिलहाल सतना जिले की हर सीमा लॉक है, दूसरे जिले से आने वाले शहर से बाहर जाने वाले हर शख्स पर पुलिस की पैनी नजर है। यही वजह है कि 24 घंटे मैदान में डटकर मुकाबला करने वाली खाकी के सम्मान में लॉक डाउन का दूसरा चरण में लोगो ने पुष्प वर्षा की और तालियो से उनका अभिनंदन किया।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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