फिर फटी फ्लाई ऐश पाइपलाइन, राखयुक्त पानी से खेत और पर्यावरण को नुकसान, NTPC प्रबंधन पर फूटा किसानों का गुस्सा

ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बाद हर बार सिर्फ लीकेज बंद कर औपचारिकता पूरी कर दी जाती है, लेकिन जर्जर पाइपलाइन को बदलने या स्थायी समाधान की दिशा में कोई गंभीर पहल नहीं होती।
NTPC Vindhyachal Thermal Power Plant Singrauli

NTPC Vindhyachal Thermal Power Plant Singrauli

एनटीपीसी विंध्याचल थर्मल पावर प्लांट (NTPC Vindhyachal Thermal Power Plant)  में लापरवाही का एक बड़ा मामला शुक्रवार को सामने आया। लेबर गेट के पास फ्लाई ऐश परिवहन की पाइपलाइन अचानक फट गई, जिससे हजारों लीटर राखयुक्त प्रदूषित पानी आसपास के क्षेत्र और खेतों में फैल गया। कुछ ही देर में पूरा इलाका राख, कीचड़ और गंदगी से पट गया। खेतों तक पहुंचे इस राखयुक्त पानी ने फसलों और पर्यावरण दोनों पर खतरे की घंटी बजा दी है।

ग्रामीणों का गुस्सा, हर बार पाइपलाइन फटती है, स्थाई समाधान नहीं 

स्थानीय ग्रामीणों ने इसे हादसा नहीं बल्कि लगातार हो रही लापरवाही बताया है। जुआड़ी गांव निवासी सुरेश कुमार पांडे के मुताबिक फ्लाई ऐश की पाइपलाइन अक्सर फटती है और राखयुक्त पानी खेतों में भर जाता है, जिससे फसलें खराब हो रही हैं। मिट्टी की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है और आसपास का वातावरण भी लगातार दूषित हो रहा है।

NTPC प्रबंधन को नहीं कोई जानकारी 

ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बाद हर बार सिर्फ लीकेज बंद कर औपचारिकता पूरी कर दी जाती है, लेकिन जर्जर पाइपलाइन को बदलने या स्थायी समाधान की दिशा में कोई गंभीर पहल नहीं होती। सबसे हैरानी की बात यह रही कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी प्रबंधन को इसकी जानकारी तक नहीं थी जब जनसंपर्क अधिकारी बात करना चाहा तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया, उनका फोन ही नहीं उठा।

बड़ा सवाल,  क्या किसी बड़े नुकसान का इंतजार?

बार-बार पाइपलाइन फटने की घटनाएं साफ बता रही हैं कि सिस्टम अंदर से जर्जर हो चुका है। इसके बावजूद जिम्मेदार अफसर तब तक नहीं जागते, जब तक मामला बाहर न आ जाए। स्थानीय निवासी पुच रह है कि क्या प्रबंधन किसी बड़े पर्यावरणीय संकट, फसल बर्बादी या जनस्वास्थ्य पर गंभीर असर के बाद ही स्थायी समाधान की तरफ सोचेगा ?

Atul Saxena
लेखक के बारे में
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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