जो रूट के लिए पाकिस्तान के खिलाफ बर्मिंघम टेस्ट की चौथी पारी बेहद खास रही। बता दें कि इंग्लैंड को जीत के लिए जरूरी रन बनाने के दौरान रूट ने संभलकर बल्लेबाजी की और 62 रन बनाकर नाबाद रहे। वहीं उनकी पारी में 9 चौके शामिल रहे। इसी अर्धशतक के साथ रूट के नाम टेस्ट क्रिकेट में कुल 69 फिफ्टी हो गई हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम था।
दरअसल जो रूट ने न सिर्फ अपनी टीम को जीत तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई बल्कि टेस्ट क्रिकेट के एक बड़े रिकॉर्ड पर भी अपना नाम दर्ज करा लिया है। अब वह टेस्ट इतिहास में सबसे ज्यादा अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं।
जो रूट के नाम सबसे ज्यादा टेस्ट अर्धशतक
जानकारी दे दें कि सचिन तेंदुलकर ने 200 टेस्ट मैचों के करियर में 68 अर्धशतक लगाए थे। उन्होंने 2013 में अपना आखिरी टेस्ट खेला था। लंबे समय तक टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा फिफ्टी का रिकॉर्ड सचिन के नाम रहा, लेकिन अब जो रूट ने इसे अपने नाम कर लिया है। जो रूट के 69 अर्धशतक के बाद वेस्टइंडीज के दिग्गज शिवनारायण चंद्रपॉल 66 फिफ्टी के साथ तीसरे नंबर पर हैं। ऑस्ट्रेलिया के एलन बॉर्डर और भारत के राहुल द्रविड़ के नाम 63-63 अर्धशतक हैं। इस तरह रूट ने सिर्फ सचिन को पीछे नहीं छोड़ा बल्कि बाकी खिलाड़ियों के मुकाबले भी इस रिकॉर्ड में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है।
टेस्ट क्रिकेट में इन खिलाड़ियों ने लगाए सबसे ज्यादा अर्धशतक
जो रूट 69 अर्धशतक
सचिन तेंदुलकर 68 अर्धशतक
शिवनारायण चंद्रपॉल 66 अर्धशतक
एलन बॉर्डर 63 अर्धशतक
राहुल द्रविड़ 63 अर्धशतक
अब सबसे ज्यादा टेस्ट रन के रिकॉर्ड पर नजर
वहीं जो रूट अब सचिन तेंदुलकर के एक और बड़े रिकॉर्ड के करीब पहुंच रहे हैं। टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड अभी सचिन के नाम है। दरअसल उन्होंने अपने करियर के 200 टेस्ट मैचों की 329 पारियों में कुल 15921 रन बनाए थे। उनके नाम 51 टेस्ट शतक भी हैं। वहीं जो रूट अब तक 169 टेस्ट मैच खेल चुके हैं। 309 पारियों में उनके नाम 14278 रन हैं और उनका बल्लेबाजी औसत 50.45 का है। यानी रूट सचिन के टेस्ट रन रिकॉर्ड से 1643 रन पीछे हैं। रूट के नाम अभी 41 टेस्ट शतक भी हैं। उन्होंने 2012 में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था और इसके बाद लगातार लंबे समय तक इंग्लैंड के टेस्ट बल्लेबाजी क्रम की अहम कड़ी बने रहे हैं। सचिन के रिकॉर्ड तक पहुंचने के लिए रूट को अभी 1643 रन और बनाने होंगे। हालांकि इसके लिए उन्हें आगे कई टेस्ट मैचों में लगातार बड़ी पारियां खेलनी होंगी।






