सोशल डिस्टेंस के साथ 50 नमाजियों ने मस्जिद में अता की जुमे की नमाज

सोशल डिस्टेंस के साथ 50 नमाजियों ने मस्जिद में अता की जुमे की नमाज

टीकमगढ़/आमिर खान

कोरोना के चलते टीकमगढ़ जिले में मस्जिदों के अंदर अब तक केवल 5 लोगों द्वारा ही नमाज पढ़ने के नियम थे, लेकिन सरकार द्वारा छूट दिए जाने के बाद शुक्रवार को जुमा की नमाज मस्जिदों में पढ़ी गई, जिसमें 50 नमाज़ी शामिल हुए। इस दौरान सोशल डिस्टेंस का विशेष तौर पर ख्याल रखा गया।

अंजुमन सदर अब्दुल रज्जाक ने बताया कि हमारा देश इन दिनों कोरोना जैसी खतरनाक बीमारी के साथ जूझ रहा है। यह बीमारी किसी का चेहरा और समाज देखकर नहीं फैल रही। इसके लिए केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार के नियमों का सभी पालन कर रहे हैं। टीकमगढ़ मुस्लिम समाज भी सरकार के नियमों का पालन कर इस बीमारी से लड़ने के लिए लगातार तैयार है। बीते दिनों इसका जीता जागता उदाहरण ईद की नमाज के दौरान देखा गया था। जब टीकमगढ़ के लोगों ने ईद की नमाज अपने घरों में ही पढ़कर एक मिसाल कायम की थी। इसी तरह बीते दिन जिला कलेक्टर हर्षिता सिंह और एसपी अनुराग ने एक बैठक आयोजित की थी, जिसमें यह निर्णय लिया गया था कि इस बार जुमे की नमाज मस्जिदों में 50 नमाजियों के साथ अता की जाएगी। टीकमगढ़ जिले के सभी मस्जिदों में 50 नमाजियों के साथ शासन के नियमानुसार नमाज अता की गई। इस दौरान लोगों ने सोशल डिस्टेंस का विशेष ध्यान रखा।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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