“मैं नियमों का पालन नहीं करता” स्लोगन वाला टीशर्ट पहने युवक की हीरोगिरी पुलिस ने निकाली

“मैं नियमों का पालन नहीं करता” स्लोगन वाला टीशर्ट पहने युवक की हीरोगिरी पुलिस ने निकाली

उज्जैन/अर्पण कुमार

लॉकडाउन में सड़कों पर हीरोगिरी करना एक युवक को महंगा पड़ा। ये युवक अपनी टीशर्ट पर स्लोगन “I dont follow rules, They follow” लिखकर घूम रहा था। साफ ज़ाहिर है कि उसका न सिर्फ कहना था बल्कि वो ये मानकर भी चल रहा था कि वो नियमों का पालन नहीं करते, कोई और करता है। इसकी जानकारी मिलने पर पुलिस ने सर्च कर युवक को गिरफ्तार किया और कुछ ही देर में उसकी सारी दादागिरी निकल गई।

ऐसे समय में जब कोरोना ने सभी को संकट में डाल रखा है, उज्जैन से लगातार खतरनाक आंकड़े सामने आ रहे हैं, किसी का ये कहना कि वो नियम पालन नहीं करता समाज में बहुत नकारात्मक संदेश देता है। जब प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री से लेकर पुलिस तक जनता से नियमों का पालन करने की अपील कर रही है, ये युवक नियमों का पालन न करने और उसे बड़ी शान से बताने वाला स्लोगन लिखा टी शर्ट पहने शहर में घूम रहा था। इसका फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और जब यह जानकारी उज्जैन पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार सिंह को लगी तो उन्होंने तत्काल सिटी एडिशनल एसपी रूपेश द्विवेदी को कहा कि इसे गिरफ्तार करो। सिटी एडिशनल एसपी ने अपनी टीम को लगाया और कुछ ही देर में युवक को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद पुलिस उस युवक को कंट्रोल रूम लेकर पहुंची। यहां कंट्रोल रूम पर युवक के हाथ में एक स्लोगन लिखी हुई तख्ती थी जिस पर अंग्रेजी में लिखा था “मैं माफी चाहता हूं अब मैं सभी प्रकार के नियमों का पालन करूंगा।” पुलिस की गिरफ्त में आते ही युवक की सारी अकड़ और हीरोगिरी निकल गई और और गिड़गिड़ाकर माफी मांगने लगा।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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