जनता कर्फ़्यू: टॉवर, गोपाल मंदिर चौराहा सहित सभी सड़को पर पसरा रहा सन्नाटा

जनता कर्फ़्यू: टॉवर, गोपाल मंदिर चौराहा सहित सभी सड़को पर पसरा रहा सन्नाटा

उज्जैन।अर्पण कुमार।

शहर में भी जनता कर्फ़्यू का प्रभावी असर दिखाई दे रहा है, सुबह से ही सबसे व्यस्ततम रहने वाले चौराहे आज सुनसान दिखाई दे रहे है। देवास गेट बस स्टेण्ड, टॉवर, आगर रोड़, महाकाल परिसर व चौराहा गोपाल मंदिर, निकास चौराहा,तोपखाना, कंठाल, तेलीवाड़ा,मालीपुरा, फ्रीगंज सुनसान पड़े है । बस स्टैंड पर इक्का दुक्का लोग ही दिखाई दे रहे है । एक रात पहले से ही प्रशासन ने धारा 144 की मुनादी पूरे शहर में करा दी थी, जिसका सकारात्मक असर शहर की जनता पर पड़ा । रेलवे स्टेशन व प्रमुख चौराहों पर पुलिस व प्रशासन तैनात है।

कलेक्टर शशांक मिश्र, संभागायुक्त आनंद शर्मा, उत्तर विधायक पारस जैन, सांसद अनिल फिरोजिया ने वीडियो जारी कर शहर की आम जनता से जनता कर्फ़्यू को सफल बनाने की अपील की थी ।महाकाल मंदिर पर एक दिन पूर्व ही शनिवार को मंदिर प्रशासक ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि आगामी आदेश तक कोरोना संक्रमण से बचाव के चलते सामान्य श्रद्धालुओं के लिए दर्शन पूरी तरह बंद कर दिए गए है।

आज रविवार को कलेक्टर ने भूतड़ी अमावस्या पर स्नान के लिए उज्जैन नहीं आने की अपील की है व लोगो से अनुरोध किया है कि वे को कोरोना वायरस  से बचने के लिए 24 मार्च को आ रही भूतड़ी अमावस्या पर स्नान के लिए उज्जैन के विभिन्न घाटों पर ना पहुंचे और ना ही यात्रा करें । उन्होंने कहा है कि कोरोना वायरस एक दूसरे से संपर्क के कारण फैलता है,इसलिए  भूतड़ी अमावस्या पर स्नान को  टाल दें व कहा है कि घर पर रहें और सुरक्षित रहें ।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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