उज्जैन में बाबा महाकाल की पहली सवारी निकली, चांदी की पालकी में दिए दर्शन, हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा शहर

महाकाल की पहली सवारी में लाखों श्रद्धालु शामिल हुए। दरअसल चांदी की पालकी में विराजमान बाबा महाकाल के दर्शन के लिए सुबह से ही भक्तों की भीड़ जुटी रही। प्रशासन ने सुरक्षा, ट्रैफिक और स्वास्थ्य सेवाओं के विशेष इंतजाम किए।
उज्जैन में बाबा महाकाल की पहली सवारी निकली, चांदी की पालकी में दिए दर्शन, हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा शहर

सावन के पहले सोमवार पर आज उज्जैन में बाबा महाकाल की पहली सवारी पूरे धार्मिक उत्साह के साथ निकाली गई। दरअसल चांदी की पालकी में विराजमान भगवान महाकाल ने नगर भ्रमण कर श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। वहीं सवारी मार्ग पर सुबह से ही हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे और पूरे शहर में “हर-हर महादेव” के जयघोष गूंजते रहे।

दरअसल महाकालेश्वर मंदिर में सुबह तड़के भस्म आरती और विशेष पूजन के बाद सवारी की तैयारियां शुरू हुईं। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था और सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस, प्रशासन तथा स्वयंसेवकों की बड़ी टीम तैनात रही। दोपहर बाद जैसे ही पालकी मंदिर से बाहर निकली, श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर बाबा महाकाल का स्वागत किया। कई श्रद्धालु अपने परिवार के साथ सवारी मार्ग पर घंटों पहले से पहुंच गए थे ताकि उन्हें बाबा के दर्शन आसानी से हो सकें।

महाकाल की पहली सवारी का पारंपरिक मार्ग

दरअसल सवारी की शुरुआत महाकालेश्वर मंदिर से हुई और यह गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंचेगी। वहीं शिप्रा तट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा महाकाल का जलाभिषेक और विशेष पूजन किया जाएगा। इसके बाद सवारी तय मार्ग से वापस मंदिर की ओर रवाना होगी। रास्ते भर अलग-अलग स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा की और भजन मंडलियों ने शिव भक्ति से जुड़े गीत प्रस्तुत किए। इस बार सवारी को और आकर्षक बनाने के लिए जनजातीय लोकनृत्य दल, पुलिस बैंड, स्काउट-गाइड, घुड़सवार दल और कई सांस्कृतिक झांकियां भी शामिल की गईं। मंदिर समिति ने कांवड़ यात्रियों के लिए भोजन प्रसादी, पेयजल, चिकित्सा सहायता और विश्राम की व्यवस्था भी की। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल, सीसीटीवी निगरानी और मेडिकल टीमों को पूरे मार्ग पर तैनात रखा गया।

सावन में महाकाल की सवारी का धार्मिक महत्व और आगे का कार्यक्रम

बता दें कि महाकाल की सवारी उज्जैन की सबसे प्राचीन धार्मिक परंपराओं में मानी जाती है। मान्यता है कि सावन और भादौ के दौरान भगवान महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलते हैं। इसी वजह से हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस सवारी में शामिल होकर बाबा का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। इस वर्ष सावन में कुल चार और भादौ में दो सवारियां निकाली जाएंगी। हर सवारी को अलग थीम के साथ प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें धार्मिक संदेशों के साथ पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जागरूकता और भारतीय संस्कृति को भी प्रमुखता दी जाएगी। प्रशासन का कहना है कि आगामी सवारियों में भी सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित मार्ग और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें ताकि सभी भक्त सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से बाबा महाकाल के दर्शन कर सकें।

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Rishabh Namdev

4 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev →
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