उज्जैन की विक्रम यूनिवर्सिटी के विद्योत्तमा गर्ल्स हॉस्टल में 26 घंटे तक बिजली गुल रहने और पानी की सप्लाई प्रभावित होने से नाराज छात्राओं ने शनिवार को जमकर हंगामा किया। दरअसल छात्राएं मेस से मिली कच्ची और जली हुई रोटियां लेकर प्रदर्शन करने बैठ गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली की गड़बड़ी से मोबाइल, चार्जर और वाई-फाई राउटर तक खराब हो गए।
साथ ही छात्राओं ने खाने की खराब क्वालिटी, गंदगी और सुरक्षा गार्डों के व्यवहार को लेकर भी शिकायत की। वहीं मामला बढ़ने पर कुलपति ने अधिकारियों की टीम हॉस्टल भेजकर समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया।
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विक्रम यूनिवर्सिटी हॉस्टल में 26 घंटे बिजली बंद
दरअसल विद्योत्तमा छात्रावास में रहने वाली छात्रा आशु नरेश ने बताया कि हॉस्टल में करीब 26 घंटे तक बिजली सप्लाई बंद रही। बिजली नहीं होने के कारण पानी की सप्लाई, वाटर कूलर और रोजमर्रा की दूसरी सुविधाएं भी प्रभावित हुईं। छात्राओं का कहना है कि उन्हें पीने के पानी और दूसरे जरूरी कामों के लिए भी परेशानी उठानी पड़ी। आशु नरेश के मुताबिक बिजली की गड़बड़ी और लो-वोल्टेज के कारण 12 चार्जर, दो वाई-फाई राउटर और कम से कम एक मोबाइल खराब हो गया। छात्राओं ने आरोप लगाया कि उन्होंने इस समस्या की जानकारी वार्डन से लेकर कुलपति तक को दी थी, लेकिन लंबे समय तक कोई समाधान नहीं हुआ।
वहीं हॉस्टल की वार्डन और गणित विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंजली श्रीवास्तव ने बताया कि बिजली में बड़े फॉल्ट की जानकारी मिलने के बाद छात्राओं को ग्रुप में सूचना दी गई थी। बिजली विभाग की ओर से दोपहर करीब 3:30 बजे तक सप्लाई शुरू होने की बात कही गई थी लेकिन इसके बाद भी हॉस्टल में बिजली नहीं आई। कई बार शिकायत करने के बाद कर्मचारी पहुंचे और काम किया। हालांकि, इसके बाद लो-वोल्टेज की समस्या सामने आ गई।
कच्ची और जली रोटियां लेकर प्रदर्शन
दरअसल बिजली के साथ-साथ छात्राओं ने हॉस्टल की मेस में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता को लेकर भी विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान वे खाने की थालियां लेकर पहुंचीं और कच्ची व जली हुई रोटियां दिखाईं। छात्राओं का आरोप है कि कई बार रोटियां अंदर से कच्ची होती हैं, तो कभी जली हुई और सूखी परोसी जाती हैं। उनका कहना है कि यह परेशानी किसी एक दिन की नहीं, बल्कि लंबे समय से बनी हुई है। छात्राओं के मुताबिक कई बार उन्हें कक्षाओं के बीच समय निकालकर हॉस्टल लौटना पड़ता है। ऐसे में मेस में जो खाना मिलता है मजबूरी में वही खाना पड़ता है। उनका यह भी कहना है कि पहले हॉस्टल में बाहर से खाना मंगाने की अनुमति नहीं थी। बाद में वार्डन को लिखित आवेदन देने के बाद टिफिन या फूड पार्सल मंगाने की छूट दी गई।
वहीं वार्डन डॉ. अंजली श्रीवास्तव ने बताया कि साल 2024 में जब उन्होंने जिम्मेदारी संभाली, उससे पहले से ही स्वयं सहायता समूह के जरिए मेस में खाना बनाया जा रहा था। छात्राएं लंबे समय से भोजन की गुणवत्ता को लेकर असंतुष्ट थीं। उनकी परेशानी देखते हुए उन्होंने बाहर से टिफिन मंगाने की अनुमति दी थी। वार्डन ने यह भी बताया कि मेस स्टाफ के छात्राओं से ठीक तरीके से बात नहीं करने की शिकायतें भी सामने आई थीं।
सुरक्षा गार्डों के व्यवहार को लेकर भी छात्राओं की शिकायत
प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। आशु नरेश का आरोप है कि सुरक्षा गार्ड कई बार छात्राओं के साथ बदसलूकी करते हैं। उन्होंने बताया कि शुक्रवार रात भी गार्ड के व्यवहार से परेशान होकर छात्राओं ने डायल-112 पर कॉल किया था। इसके बाद पुलिस हॉस्टल पहुंची थी। छात्राओं ने प्रशासन से गार्डों के व्यवहार पर ध्यान देने और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर करने की मांग की।
