जिस गाड़ी से RTO स्टाफ काट रहा था चालान, वही वाहन उड़ा रहा नियमों की धज्जियां, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

देखना यह होगा कि वायरल वीडियो से उठे इस विवाद का अंत किस दिशा में होता है? क्या यह मामला व्यवस्था में सुधार की राह खोल पाएगा या फिर अन्य मामलों की तरह समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
Umaria RTO Staff Challan

Umaria RTO Staff Challan

ट्रैफिक रूल सबके लिए बराबर है और इसका पालन करना सभी की जिम्मेदारी है और यदि कोई नियमों का उल्लंघन करे तो नियमानुसार चालान काटना परिवहन विभाग, पुलिस विभाग का अधिकार है…अब आप सोच रहे होंगे हम आपको ये क्यों बता रहे हैं ये तो सब जानते हैं… आइये बताते हैं आपको इसकी वजह …

दर असल उमरिया में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक गाड़ी पर RTO स्टाफ लोगों का चालान काटता दिखाई दे रहा है इस वीडियो की विशेषता ये है कि जिस गाड़ी में बैठकर आरटीओ स्टाफ आया और सड़क पर खड़ी कर लोगों के कागज चैक कर चालान काट रहा है वही वाहन ट्रैफिक नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहा है। जो युवक वीडियो बना रहा है वो बिना डरे एक नागरिक को मिले अधिकारों के तहत कह रहा है पहले आप अपनी गाड़ी का चालान काटिए फिर मेरी गाड़ी का चालान काटिए।

प्राइवेट गाड़ी से RTO स्टाफ काट रहा चालान 

वायरल वीडियो में युवक आरटीओ स्टाफ से कह रहा है आपकी गाड़ी में पीछे नंबर प्लेट नहीं है , इसका टैक्सी परमिट भी नहीं है पहले इसका चालान काटिए फिर मेरी पिक अप गाड़ी का चालान बनाइये, मेरी आरटीओ मैडम से बात कराइए, युवक की बात भी सही है गाड़ी पर जो नंबर प्लेट लगी है उसपर प्राइवेट नम्बर है और नियमानुसार नंबर प्लेट भी हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) नहीं है।

इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जब नियमों का पालन कराने वाली संस्था के भीतर ही नियमों की अनदेखी हो रही हो, तो आम जनता के साथ सख्ती क्यों? शहर के लोगों का कहना है कि आरटीओ विभाग द्वारा छोटे-छोटे नियमों के उल्लंघन पर चालान काटे जाते हैं, लेकिन यदि विभाग के भीतर ही ऐसे उदाहरण सामने आएंगे, तो सिर्फ जनता ही क्यों भुगते ?

अपनों पर करम, गैरों पर सितम.. लोग कर रहे सवाल  

स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर खासा आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि उनकी गाड़ी में नंबर प्लेट अधूरी हो या किसी भी प्रकार की कमी हो, तो तुरंत चालान किया जाता है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि जब अधिकारी या उनसे जुड़े लोग नियमों का पालन नहीं करते, तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? अब इस मामले में जब मीडिया ने आरटीओ रमा दुबे से बात की तो वे सीधे तौर पर अपने स्टाफ का बचाव करती दिखाई दी।

एक और मुद्दा जो इस वीडियो के साथ सामने आ रहा है, वह है आरटीओ अधिकारी का कार्यालय में पर्याप्त समय न देना। कई लोगों का आरोप है कि अधिकारी की अनुपस्थिति के अव्यवस्था फैलती है और ऐसे विवादित हालात पैदा होते हैं। यही वजह है कि अब यह मामला सिर्फ एक वीडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रहा है।

लोगों को अब प्रशासन के एक्शन का इन्तजार 

सोशल मीडिया पर वीडियो के वायरल होते ही लोगों की प्रतिक्रियाएं भी तेजी से सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे सिस्टम की लापरवाही बता रहे हैं, तो कुछ इसे सुधार का मौका मान रहे हैं। हालांकि, अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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