
लोकसभा में जिस दिन बिहार के मुद्दे पर विपक्ष गरज रहा था, उसी दिन सदन से बाहर एक तस्वीर ने सबका ध्यान खींच लिया। तस्वीर में दो चेहरे हैं एक यूपी की सियासत में विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा, अखिलेश यादव। दूसरा, भाजपा का फायरब्रांड नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह। दोनों नेता लोकसभा परिसर में गले मिलते, मुस्कुराते और ठिठोली करते दिखे। ये वही दो नेता हैं, जो अक्सर एक-दूसरे के खिलाफ सियासी तलवारें भांजते दिखते हैं। लेकिन मंगलवार को नज़ारा कुछ और ही था।
संसद का मानसून सत्र चल रहा है। मंगलवार को विपक्ष ने बिहार में वोटर्स लिस्ट की जांच और स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर जमकर हंगामा किया। सदन पहले दो बार और फिर पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। लेकिन जैसे ही सदन स्थगित हुआ, लोकसभा परिसर में कैमरे घूम गए।
गिरिराज सिंह और अखिलेश यादव जब आमने-सामने हुए, तो गिरिराज ने बढ़कर अखिलेश को गले लगा लिया। दोनों नेताओं की मुलाकात के वक्त उनके पीछे आज़मगढ़ से सपा सांसद धर्मेंद्र यादव भी खड़े थे, जो मुस्कुराते नज़र आए। इसके बाद अखिलेश यादव ने मीडिया को खुद इशारा किया, “भाई, इसको रिकॉर्ड करो!” फिर क्या था, कैमरे चालू हो गए और राजनीति में तस्वीरों की अहमियत समझने वाले लोग अलर्ट हो गए।
क्या कहती है यह फोटो?
राजनीति में मुलाकातें सिर्फ मुलाकातें नहीं होतीं, संकेत भी होती हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव और भाजपा के कट्टर हिंदुत्व का चेहरा माने जाने वाले गिरिराज सिंह की यह झप्पी सिर्फ एक व्यक्तिगत सौहार्द नहीं, बल्कि बड़ा सियासी मैसेज मानी जा रही है।
एक तरफ अखिलेश यादव हाल के महीनों में ‘हिंदू विरोधी’ छवि तोड़ने की कोशिश में दिखे हैं। तो दूसरी ओर भाजपा गिरिराज के ज़रिए यह बताना चाह रही है कि पार्टी का यादवों से कोई विरोध नहीं है। याद करें मध्य प्रदेश में मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने पहले ही यह संकेत देने की कोशिश की थी।
मुलाकात के पीछे की सियासत
बिहार की राजनीति में यादव वोट बैंक को आरजेडी की ताक़त माना जाता है। ऐसे में गिरिराज और अखिलेश की मुस्कुराहट और जफ्फी वाली तस्वीर को कई लोग बिहार में बीजेपी की संभावित ‘सोशल इंजीनियरिंग’ की ओर इशारा मान रहे हैं। साथ ही यूपी में भी यह इमेज बिल्डिंग का हिस्सा हो सकता है, जहां विपक्ष को हिन्दू विरोधी ठहराने की बीजेपी की रणनीति के जवाब में अखिलेश एक संतुलित चेहरा पेश कर रहे हैं।
नजरिया बदला, राजनीति नहीं
हालांकि, मुलाकात के बाद किसी भी नेता ने इसे लेकर बयान नहीं दिया। लेकिन तस्वीरों का भी अपना बयान होता है। अब ये झप्पी कोई गठबंधन का संकेत है या सिर्फ लाइट मोमेंट इसका जवाब वक़्त देगा। लेकिन इतना ज़रूर है कि लोकसभा परिसर में गिरिराज और अखिलेश की ये मुलाकात आने वाले हफ्तों तक राजनीतिक गलियारों में चर्चा का मुद्दा बनी रहेगी।
