
उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने सोमवार को केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के साथ बौद्ध सर्किट के अंतर्गत कपिलवस्तु के विकास पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि विदेशी पर्यटकों को कपिलवस्तु पहुंचने में हो रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए ककरहवा सीमा पर इमीग्रेशन कार्यालय खोलने की योजना पर काम चल रहा है। इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री ने विदेश मंत्रालय से बात करने का आश्वासन दिया है, क्योंकि वर्तमान में ककरहवा बॉर्डर पर भारत सरकार का कोई इमीग्रेशन कार्यालय नहीं है।
जयवीर सिंह ने केंद्रीय मंत्री को राज्य की 12 पर्यटन योजनाओं के प्रस्ताव सौंपे, जिनमें कालिंजर और तालबेहट किलों के आसपास पर्यटन विकास, अल्पज्ञात स्थलों का संवर्धन, वे-साइड एमेनिटीज की व्यवस्था और मथुरा के गोवर्धन में प्रासाद योजना के तहत पर्यटन विकास परियोजना शामिल हैं। इसके अलावा, सिद्धार्थनगर के पिपरहवा में 1898 में प्राप्त बौद्ध अस्थियों और अवशेषों को संरक्षित करने के लिए भव्य स्तूपनुमा भवन बनाने का प्रस्ताव भी दिया गया है। इन योजनाओं से उत्तर प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
नीलकंठ महादेव मंदिर में निशुल्क प्रवेश की व्यवस्था
पर्यटन मंत्री ने कालिंजर किले में नीलकंठ महादेव मंदिर में निशुल्क प्रवेश की व्यवस्था और कालिंजर व तालबेहट किलों को राज्य सरकार को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-25 पर कुशीनगर-गया रोड पर वे-साइड एमेनिटीज को पर्यटन विभाग को सौंपने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ये कदम पर्यटकों की सुविधा और क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।
दो से अधिक प्रोजेक्ट्स आवंटित करने की मांग
जयवीर सिंह ने भारत सरकार की आईकॉनिक डेस्टिनेशन योजना के तहत वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश के क्षेत्रफल और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए दो से अधिक प्रोजेक्ट्स आवंटित करने की मांग की। साथ ही, टैगोर कल्चरल कॉम्प्लेक्स योजना के तहत गौतमबुद्ध नगर में सांस्कृतिक संकुल केंद्र के निर्माण और लखनऊ के चारबाग स्थित रवींद्रालय प्रेक्षागृह के पुनर्विकास का प्रस्ताव भी दिया गया। ये पहल उत्तर प्रदेश को सांस्कृतिक और पर्यटन के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
