
JP Nadda targets Rahul Gandhi
देश का सियासी पारा इन दिनों हाई है, कांग्रेस ने वोट चोरी और SIR एक मुद्दे पर आंदोलन छेड़ रखा है , पिछले दिनों रामलीला मैदान में लाखों लोगों की भीड़ के साथ कांग्रेस ने सरकार और चुनाव आयोग पर हमला किया, सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़े विपक्ष का कहाँ है कि जब तक इस्तीफा नहीं होगा चुप नहीं बैठेंगे, वोट चोरों को भगाकर रहेंगे, कांग्रेस के नेतृत्व में हो रहे ‘वोट बचाओ संविधान बचाओ’ आंदोलन पर पलटवार करते हुए भाजपा देश में ‘लोकतंत्र बचाओ , अराजकता हटाओ’ आंदोलन चला रही है।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा आज ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ (Save Democracy Remove Anarchy) आंदोलन के तहत बरेली में आयोजित रैली में शामिल होने पहुंचे उन्होंने राहुल गांधी सहित इंडी गठबंधन के नेताओं पर जमकर निशाना साधा, नड्डा ने एक बच्चे की कहानी सुनाकर राहुल गांधी पर निशाना साधा, उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस ने 90 बार चुनी हुई सरकार को गिराया, नड्डा ने इंडी गठबंधन में बेल पर बाहर नेताओं, दंगों इमं शामिल नेताओं और भ्रष्टाचार के आरोपी नेताओं की गिनती भी बताई।
जेपी नड्डा ने कहा भारत प्रजातंत्र की जननी (Mother of Democracy) कहा जाता है। दशकों की मेहनत के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने दुनिया में अपना स्थान बनाया है। हमारे सुप्रीम कोर्ट ने भी वर्षों की मेहनत के बाद अपना समाज, देश और दुनिया में स्थान बनाया है। लेकिन, कुछ गैर जिम्मेदार पार्टियां, विशेष तौर पर INDI गठबंधन, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के लोग चुनाव आयोग के बारे में लोगों के दिलों में जो विश्वास है, उस विश्वास को तोड़ने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने एक कहानी सुनाते हुए कहा- आपने देखा होगा कि बचपन में कुछ बच्चे ऐसे होते हैं, जो पढ़ने में बहुत अच्छे नहीं होते। वो बच्चे कभी-कभी पास हो जाते हैं, तो कहते हैं कि मैं बड़ा होशियार हूं और जब फेल हो जाते हैं, तो कहते हैं कि टीचर बड़ा बेईमान है मेरा विरोधी है। ऐसे ही राहुल बाबा हैं। ये कभी-कभी चुनाव जीत जाएं, तो मैं बड़ा होशियार और अधिकतर चुनाव हारें, तो चुनाव आयोग बेईमान।
चुनाव आयोग के कार्य के प्रति गंभीरता का जिक्र करते हुए कुछ उदाहरण दिए, उन्होंने कहा- 2024 में गिर के जंगल में केवल 1 वोट के लिए इलेक्शन कमीशन के 10 लोग 10 किमी पैदल गए थे और वो एक वोट डलवाया था। ऐसे ही अरुणाचल प्रदेश के मालोगाम में 44 वर्ष के एक व्यक्ति के लिए पहाड़ों में चढ़कर वोट डलवाने का काम चुनाव आयोग ने किया था। चुनाव आयोग का विचार है कि आप इलेक्शन कमीशन के दरवाजे पर नहीं आएंगे, बल्कि इलेक्शन खुद आपके दरवाजे पर आएगा।
इमरजेंसी का जिक्र कर केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर किया हमला
कांग्रेस के लोकतंत्र बचाओ नारे पर हमला करते हुए जेपी नड्डा ने कहा, आजकल ये लोकतंत्र की दुहाई दे रहे हैं। राहुल बाबा, जरा याद करो कि तुम्हारी दादी ने 1.30 लाख लोगों को बिना दलील, बिना अपील, बिना किसी कारण के 22 महीने के लिए इमरजेंसी के दौरान जेल के अंदर डाला था और तुम लोकतंत्र की बात करते हो। अंग्रेजों ने आजादी के सारे आंदोलन में भी इतनी बड़ी संख्या में लोगों को जेल में नहीं डाला, जितनो को श्रीमती इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी के दौरान जेल में डाला था।
नड्डा बोले कांग्रेस ने 90 बार चुनी हुई सरकारों को बर्खास्त किया
कांग्रेस पार्टी ने 90 बार चुनी हुई सरकारों को बर्खास्त किया। अकेले श्रीमती इंदिरा गांधी ने 50 बार इस तरह का काम किया। ये लोग लोकतंत्र की दुहाई देते हैं। ये लोग Regime Change की बात करते हैं। ये प्रजातांत्रिक देश है, चुनाव आएंगे, वहां दो-दो हाथ कर लेना। वहां भारत की जनता तय करेगी कि किसको वोट देना है, किसको नहीं।
बेल पर बाहर और भ्रष्टाचार के आरोपी नेताओं के नाम लेकर निशाना
इंडी गठबंधन में शामिल नेताओं पर निशाना साधते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा INDI गठबंधन के 4 ऐसे नेता हैं, जो बेल पर हैं। राहुल गांधी, सोनिया गांधी, तेजस्वी यादव और फारूक अब्दुल्ला, इसके अलावा 13 ऐसे नेता हैं जिन पर भ्रष्टाचार का आरोप है। राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, महुआ मोइत्रा, ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, संजय राउत, फारूक अब्दुल्ला, अखिलेश यादव, अशोक गहलोत, मल्लिकार्जुन खड़गे, महबूबा मुफ्ती, केसी वेणुगोपाल के ऊपर भ्रष्टाचार के केस चल रहे हैं।
नड्डा के निशाने पर अखिलेश, ममता और तेजस्वी
नड्डा यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा इन नेताओं में 3 ऐसे नेता हैं जिनके नाम दंगों में आएं हैं। सबसे ऊपर हैं अखिलेश यादव, जिनपर आरोप है कि मुजफ्फरनगर दंगे, बरेली दंगे, मथुरा दंगे, प्रतापगढ़, मेरठ और प्रयागराज एवं लखनऊ में भी इन्होंने दंगे कराए थे।ममता बनर्जी ने मुर्शिदाबाद में दंगे कराए और तेजस्वी यादव ने बिहार शरीफ में दंगे कराए और दो ऐसे नेता हैं, जो अपनी विधानसभा भी हार गए, वो हैं ममता बनर्जी और महबूबा मुफ्ती। ये लोग रामलीला मैदान में आकर भारत की जनता को पाठ पढ़ाने की कोशिश कर रहे थे।
पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

