
उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने मंगलवार को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव कर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन एक दिन पहले बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह के आवास के घेराव के बाद हुआ। प्रदर्शन की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए अभ्यर्थियों को इको गार्डन भेज दिया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि 2018 में शुरू हुई इस भर्ती प्रक्रिया में व्यापक अनियमितताएं हुईं, जिसके कारण आरक्षित वर्ग के हजारों अभ्यर्थी नौकरी से वंचित रह गए।
अभ्यर्थियों का कहना है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया था, लेकिन सरकार की लापरवाही के कारण उसका पालन नहीं हुआ। अब यह मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में उनकी मजबूत पैरवी करने से पीछे हट रही है। उन्होंने बताया कि कोर्ट में 20 से अधिक तारीखें लग चुकी हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी। अभ्यर्थियों ने सरकार से इस मामले में त्वरित कार्रवाई और न्याय की मांग की है
आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ व्यापक अन्याय
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने कहा कि 2018 की शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ व्यापक अन्याय हुआ है। उन्होंने बताया कि 13 अगस्त 2024 को लखनऊ पीठ की डबल बेंच ने आरक्षित वर्ग के हित में फैसला सुनाते हुए तीन महीने के भीतर नियुक्ति देने का आदेश दिया था। पटेल ने यह भी कहा कि 2 सितंबर को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव करने पर उन्होंने तुरंत न्याय का आश्वासन दिया था, लेकिन अधिकारियों ने उनकी बात को अनसुना कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट में मामला फंसने से उम्मीदें कमजोर
अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार की उदासीनता के कारण उनकी मांगें पूरी नहीं हो रही हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामला फंसने से उनकी उम्मीदें कमजोर पड़ रही हैं। प्रदर्शनकारी लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं ताकि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द नियुक्ति मिल सके। यह प्रदर्शन उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग को और मजबूत करता है।
