लखनऊ नगर निगम बैठक में मचा हंगामा; BJP पार्षद के आरोप पर मेयर बोलीं- तमीज से बात करें, जानें मामला

बैठक में पार्कों के रखरखाव को लेकर भी विवाद गहराया। भाजपा, सपा और कांग्रेस के पार्षद एकजुट होकर अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। पार्षदों ने आरोप लगाया कि पूरे शहर के पार्कों का रखरखाव एक ही ठेकेदार को देने की साजिश रची जा रही है।
लखनऊ नगर निगम बैठक में मचा हंगामा; BJP पार्षद के आरोप पर मेयर बोलीं- तमीज से बात करें, जानें मामला

लखनऊ नगर निगम की मंगलवार को आयोजित सदन की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। भाजपा पार्षद मुकेश सिंह मोंटी ने महापौर सुषमा खरकवाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे जनता के हितों के बजाय निजी कार्यों को प्राथमिकता दे रही हैं। इससे नाराज महापौर ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसी बदतमीजी बर्दाश्त नहीं होगी और तमीज से बात की जाए। मोंटी ने स्ट्रीट लाइट टेंडर में अनियमितताओं का आरोप लगाया, जिसके बाद सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया और मामला इतना बढ़ा कि बैठक को आधे घंटे के लिए स्थगित करना पड़ा।

मोंटी ने स्ट्रीट लाइट मेंटिनेंस टेंडर में घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा कि शुरुआती 23 शर्तों को घटाकर 18 किया गया और दोबारा टेंडर में केवल एक ठेकेदार ने हिस्सा लिया, जिसे महापौर के इशारे पर पास कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि यह ठेकेदार पहले सफाई के ठेके को लेकर विवाद में था, लेकिन बाद में मामला वापस ले लिया गया। मोंटी ने यह भी घोषणा की कि वे अब भाजपा के साथ नहीं रहेंगे। कांग्रेस पार्षद मुकेश सिंह चौहान और कुछ अन्य भाजपा पार्षदों ने भी सिंगल टेंडर की मंजूरी को नियमविरुद्ध बताते हुए इसकी तत्काल रद्द करने की मांग की।

अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी

बैठक में पार्कों के रखरखाव को लेकर भी विवाद गहराया। भाजपा, सपा और कांग्रेस के पार्षद एकजुट होकर अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। पार्षदों ने आरोप लगाया कि पूरे शहर के पार्कों का रखरखाव एक ही ठेकेदार को देने की साजिश रची जा रही है। भाजपा पार्षद प्रमोद सिंह राजन ने खुलासा किया कि इस ठेकेदार की आठ कंपनियां पहले से नगर निगम में अलग-अलग नामों से कार्यरत हैं। पार्षदों ने जोनवार टेंडर के बजाय वार्डवार टेंडर न करने को लेकर हंगामा किया और इसे ठेकेदार को लाभ पहुंचाने की साजिश करार दिया।

स्थिति बेकाबू होने पर अधिकारी बैठक छोड़कर चले

विवाद तब और बढ़ गया जब अपर नगर आयुक्त ने कहा कि इस मामले में निर्णय लेने का अधिकार सदन को नहीं है। इस बयान ने पार्षदों का गुस्सा भड़का दिया और वे नारे लगाने लगे। सदन में “आवाज दो, हम एक हैं” और “तानाशाही नहीं चलेगी” जैसे नारे गूंजे। स्थिति बेकाबू होने पर अधिकारी बैठक छोड़कर चले गए। पार्षदों ने नगर आयुक्त पर भी सवाल उठाए, जिन्होंने पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी थी। इस हंगामे ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

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