योगी सरकार का UP के सभी 59,163 गांवों के लिए बड़ा ऐलान, बस सेवा को मिली कैबिनेट मंजूरी

10 मार्च को लखनऊ में हुई योगी सरकार की कैबिनेट बैठक में फैसला हुआ कि उत्तर प्रदेश की सभी 59,163 ग्राम सभाओं तक बस सेवा पहुंचाई जाएगी। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के मुताबिक यह काम मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना 2026 के तहत 28 सीटर बसों से होगा, ताकि छोटे ग्रामीण रास्तों पर भी सेवा चल सके। सरकार का दावा है कि इससे गांवों से ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय तक रोज़ाना आने-जाने की दिक्कत कम होगी।
योगी सरकार का UP के सभी 59,163 गांवों के लिए बड़ा ऐलान, बस सेवा को मिली कैबिनेट मंजूरी

मंगलवार 10 मार्च को लखनऊ में हुई कैबिनेट बैठक के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने गांवों की आवाजाही पर बड़ा फैसला लिया। पंचायत चुनाव की चर्चाओं के बीच सरकार ने कहा है कि राज्य की सभी 59,163 ग्राम सभाओं तक बस सेवा पहुंचाई जाएगी।

यह घोषणा कागज पर आंकड़ा भर नहीं है। गांव के उस छात्र के लिए मायने रखती है जिसे कोचिंग या परीक्षा के लिए तहसील जाना पड़ता है, उस मरीज के लिए भी जो जिला अस्पताल तक पहुंचने में घंटों फंस जाता है, और उन परिवारों के लिए भी जो अब तक डग्गामार वाहनों पर निर्भर थे।

सुबह की बस, सीधा ब्लॉक-तहसील होते जिला मुख्यालय तक

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना 2026 को मंजूरी मिल चुकी है। योजना का लक्ष्य है कि ग्राम सभा स्तर तक बस पहुंचे और अधिकतर बसें सुबह 10 बजे तक ब्लॉक, तहसील होते हुए जिला मुख्यालय पहुंच जाएं, ताकि लोगों का दिनभर का सरकारी और निजी काम एक ही ट्रिप में निपट सके।

यानी रूट का डिजाइन रोजमर्रा की जरूरतों के हिसाब से रखा गया है, सिर्फ औपचारिक उद्घाटन के लिए नहीं।

28 सीटर बसों पर जोर, क्योंकि गांव की सड़कें बड़ी बस नहीं झेलतीं

सरकार ने साफ किया है कि इस योजना में छोटी 28 सीटर बसें चलाई जाएंगी। तर्क भी सीधा है: कई ग्रामीण सड़कों पर बड़ी बसों की आवाजाही मुश्किल है, इसलिए हल्की और छोटी क्षमता वाली बसें ऑपरेशनल रूप से ज्यादा कारगर होंगी।

मंत्री के अनुसार दिन में 10 बजे से शाम 4 बजे तक इन बसों को जरूरत के मुताबिक दूसरे रूट पर डायवर्ट किया जा सकेगा, और 4 बजे के बाद इन्हें फिर संबंधित गांवों की तरफ चलाया जाएगा ताकि रात करीब 8 बजे तक बस गांवों में पहुंच सके। इस टाइमिंग का फायदा नौकरीपेशा, छोटे कारोबारी, मरीज और छात्रों को एक साथ मिल सकता है।

12,200 गांवों में सेवा पहले से, अब लक्ष्य पूरा प्रदेश

दयाशंकर सिंह ने कहा कि फिलहाल करीब 12,200 गांवों तक बसें जा रही हैं, लेकिन नई मंजूरी का दायरा पूरे प्रदेश की 59,163 ग्राम सभाओं को कवर करना है। यह विस्तार संख्या के लिहाज से बड़ा है और प्रशासनिक स्तर पर जिलावार प्लानिंग की मांग करेगा।

सरकार ने यह भी कहा है कि योजना के तहत टैक्स नहीं लिया जाएगा और निजी ऑपरेटरों को बसें चलाने की अनुमति दी जाएगी। ये बसें UPSRTC से अनुबंधित मॉडल पर चलेंगी, यानी संचालन में निजी भागीदारी होगी लेकिन ढांचा सरकारी निगरानी में रहेगा।

जिलाधिकारी की कमेटी तय करेगी कौन-सा रूट, कौन-सा ऑपरेटर

योजना के क्रियान्वयन के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी बनेगी, जिसमें परिवहन विभाग के क्षेत्रीय प्रबंधक भी शामिल रहेंगे। यही कमेटी स्थानीय जरूरत, सड़क की स्थिति और मांग के हिसाब से संचालन की रूपरेखा तय करेगी।

मंत्री ने यह भी कहा कि कोशिश रहेगी कि बसों के ड्राइवर और कंडक्टर संबंधित गांवों के हों, ताकि स्थानीय लोगों को यात्रा में व्यवहारिक मदद मिले और सेवा की जवाबदेही भी मजबूत रहे।

इस फैसले के पीछे बड़ा संदेश साफ है: गांव से जिला मुख्यालय तक पहुंच को नियमित पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जोड़ना। अब अगला चरण जिलों में कमेटियों के गठन, रूट तय करने और UPSRTC अनुबंध प्रक्रिया को जमीन पर उतारने का है, जिसके बाद योजना का असली असर दिखेगा।

Banshika Sharma
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मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
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