UP में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं, सीएम योगी ने जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई के दिए निर्देश

मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा कि यूपी में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है और कृत्रिम संकट बनाने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। 13 से 21 मार्च के बीच अलविदा नमाज, SI भर्ती परीक्षा और ईद की संभावित तारीखों को देखते हुए पूरे प्रदेश को कानून-व्यवस्था के लिहाज से संवेदनशील अवधि माना गया है। अयोध्या में 27 मार्च रामनवमी और 19 मार्च राष्ट्रपति दौरे को लेकर सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और प्रोटोकॉल पर जिलों को सख्त निर्देश दिए गए हैं।
CM Yogi Adityanath

मंगलवार को लखनऊ में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का फोकस बिल्कुल साफ था: त्योहार, भर्ती परीक्षा और भीड़ वाले आयोजनों के बीच कानून-व्यवस्था ढीली नहीं पड़नी चाहिए। आम लोगों के लिए सबसे सीधा संदेश यह रहा कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है, सप्लाई और वितरण सामान्य है, और घबराहट फैलाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सीएम ने खाद्य एवं रसद विभाग को फील्ड में सक्रिय रहने को कहा। निर्देश यह है कि अधिकारी सिर्फ फाइलों पर नहीं, बाजार में दिखें। जमाखोरी और कालाबाजारी पर कड़ी निगरानी रखी जाए और अनियमितता मिलते ही सख्त कार्रवाई हो। संदेश प्रशासनिक भी है और मनोवैज्ञानिक भी, ताकि अफवाह से कतारें न बनें और कृत्रिम संकट खड़ा न हो।

भक्ति का बड़ा जमावड़ा, प्रशासन के लिए असली परीक्षा

चैत्र नवरात्र की तैयारियों की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने उन शक्तिपीठों का नाम लेकर व्यवस्था पर जोर दिया, जहां हर साल भारी भीड़ उमड़ती है: बलरामपुर का देवीपाटन मंदिर, सहारनपुर की शाकुंभरी देवी, मिर्जापुर का मां विंध्यवासिनी धाम और सीतापुर का ललिता देवी मंदिर। इन जगहों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही अचानक बढ़ती है, इसलिए सुरक्षा, ट्रैफिक, पेयजल और साफ-सफाई को एक साथ चलाने की हिदायत दी गई।

अयोध्या को लेकर निर्देश और ज्यादा स्पष्ट रहे। 27 मार्च को श्रीरामनवमी पर सुगम दर्शन, भीड़ नियंत्रण, फुट पेट्रोलिंग, पीने के पानी और स्वच्छता की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। भीड़ प्रबंधन में छोटी चूक भी बड़े दबाव में बदलती है। यही चिंता बैठक के केंद्र में रही।

19 से 21 मार्च तक लगातार तीन बड़े दबाव बिंदु

राज्य सरकार ने 13 मार्च की अलविदा नमाज के बाद 14-15 मार्च को प्रस्तावित सब-इंस्पेक्टर एवं समकक्ष पदों की लिखित परीक्षा और 20-21 मार्च को ईद-उल-फितर की संभावित तारीखों को एक संयुक्त संवेदनशील अवधि माना है। मुख्यमंत्री ने साफ निर्देश दिया कि इस दौरान किसी नई परंपरा को अनुमति न दी जाए और समाज-विरोधी या राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों पर जीरो टॉलरेंस रखा जाए।

यह कैलेंडर प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण है क्योंकि एक तरफ धार्मिक भीड़ का दबाव है, दूसरी तरफ परीक्षा केंद्रों पर हजारों अभ्यर्थियों की आवाजाही। अलग-अलग जिलों से आने वाले उम्मीदवारों को देखते हुए प्रभावी ट्रैफिक प्लान लागू करने को कहा गया है, ताकि परीक्षा समय पर और व्यवस्थित तरीके से हो सके।

साफ शब्दों में कहा गया कि परीक्षा की शुचिता और गोपनीयता से कोई समझौता नहीं होगा।

पेपर लीक से अफवाह तक, सोशल मीडिया पर कड़ी नजर

SI भर्ती परीक्षा को लेकर मुख्यमंत्री ने इंटेलिजेंस तंत्र को पूरी तरह सक्रिय रखने के निर्देश दिए हैं। सोशल मीडिया मॉनिटरिंग लगातार होगी, ताकि भ्रामक पोस्ट, फर्जी प्रश्नपत्र या अफवाहों का तुरंत खंडन किया जा सके। हर परीक्षा केंद्र के बाहर पीआरवी-112 की अनिवार्य तैनाती का निर्देश भी इसी रणनीति का हिस्सा है।

बैठक में मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, एडीजी जोन, पुलिस आयुक्त, आईजी रेंज, एसपी और शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मतलब यह कि आदेश सिर्फ सामान्य अपील नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक श्रृंखला के लिए ऑपरेशनल निर्देश हैं।

19 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अयोध्या और मथुरा दौरा प्रस्तावित है, इसलिए प्रोटोकॉल और सुरक्षा की तैयारी समय से पूरी करने को कहा गया है। राज्य मशीनरी के सामने अब तय क्रम स्पष्ट है: 13 मार्च अलविदा नमाज, 14-15 मार्च भर्ती परीक्षा, 19 मार्च राष्ट्रपति दौरा, 20-21 मार्च ईद की संभावित नमाज और 27 मार्च रामनवमी। अगले कुछ दिन यूपी प्रशासन के लिए सीधी फील्ड टेस्टिंग वाले हैं।

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