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सुपवा त सुपवा चलनियों बोले..; बिजली को लेकर अफसरों और विपक्ष पर हमला बोले मंत्री एके शर्मा

Written by:Saurabh Singh
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एके शर्मा ने कहा कि डबल इंजन की सरकार यूपी को विकसित भारत के अनुरूप बनाना चाहती है। हमारी प्रतिस्पर्धा किसी और से नहीं, बल्कि खुद से है। हम हर दिन जनता को पहले से बेहतर सेवा देना चाहते हैं।
सुपवा त सुपवा चलनियों बोले..; बिजली को लेकर अफसरों और विपक्ष पर हमला बोले मंत्री एके शर्मा

उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने अब विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट जारी कर उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को आड़े हाथों लिया। कहा, जो लोग आज बिजली की चिंता का नाटक कर रहे हैं, वही इसके असली गुनहगार हैं। अगर इन दलों ने अपने शासनकाल में बिजली व्यवस्था की एक चौथाई भी चिंता की होती, तो बीजेपी को प्रदेश में खस्ताहाल बिजली तंत्र नहीं विरासत में मिलता।

मंत्री ने कसा तंज

अपने पोस्ट में मंत्री शर्मा ने तंज भरे लहजे में लिखा, “सुपवा त सुपवा, चलनियों बोले जेमें बहत्तर छेद…” यानी जिनके खुद के शासनकाल में अंधेरे का बोलबाला था, वो आज बिजली की दुहाई दे रहे हैं।

बलिया का वीडियो बताया फेक

ऊर्जा मंत्री ने बलिया के एक अस्पताल का हवाला देते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं ने बिजली न होने का जो वीडियो वायरल किया था, वो फेक निकला। “बलिया अस्पताल में बिजली बिल्कुल ठीक थी। उसी दिन का शाम वाला वीडियो भी मौजूद है।” उन्होंने सुल्तानपुर और मथुरा के मंदिरों से जुड़े पुराने मामलों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे कई बार विपक्ष ने एडिटेड वीडियो के जरिए भ्रम फैलाने की कोशिश की है।

सिस्टम सुधार रही है सरकार

एके शर्मा ने लिखा कि डबल इंजन की सरकार यूपी को विकसित भारत के अनुरूप बनाना चाहती है। “हमारी प्रतिस्पर्धा किसी और से नहीं, बल्कि खुद से है। हम हर दिन जनता को पहले से बेहतर सेवा देना चाहते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि उपभोक्ता को देवता मानते हैं और उनकी कोई भी पीड़ा बर्दाश्त नहीं की जाती।

उपलब्धियों की लिस्ट

ऊर्जा मंत्री ने बीते वर्षों में बिजली क्षेत्र में आई बड़ी-बड़ी तब्दीलियों की लंबी सूची गिनाई। मुख्य बिंदु कुछ ऐसे हैं-

  • 2012-17 में यूपी की औसत पीक डिमांड 13,000 मेगावाट थी, जो अब 30,000 मेगावाट के पार है।
  • 2017 में यूपी का खुद का उत्पादन 5160 मेगावाट था, जो अब बढ़कर 9120 मेगावाट हो गया है।
  • सभी स्रोतों से 2017 में कुल उपलब्धता 11,803 मेगावाट थी, जो अब 20,038 मेगावाट हो चुकी है।
  • ट्रांसमिशन क्षमता 2017 में 39,000 MVA थी, जो अब 2 लाख MVA है—करीब 6 गुना वृद्धि।
  • तीन साल में 1.59 लाख किमी पुराने तार बदले गए, 29 लाख खंभे भी बदले गए हैं।
  • 1.50 लाख मजरों का विद्युतीकरण किया गया है जो पहले उपेक्षित थे।
  • अब हर गांव, हर नगर, हर प्रतिष्ठान में 18 से 24 घंटे बिजली दी जा रही है।
  • ‘आपके वक्त के खंभे बच्चों के झूले थे, अब उनमें बिजली दौड़ती है’

मंत्री ने कहा कि पहले के समय बिजली के खंभे सिर्फ कपड़े सुखाने और बच्चों के झूले झुलाने के काम आते थे। अब उन तारों में बिजली दौड़ रही है। आपके शासन में 10 दिन में एक बार बिजली आती थी, अब हर जगह रोज आती है।आखिर में ऊर्जा मंत्री ने विपक्ष को नसीहत देते हुए लिखा कि आईना जब भी उठाया करो, पहले देखो; फिर दिखाया करो।

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Saurabh Singh
लेखक के बारे में
राजनीति में गहरी रुचि. खबरों के विश्लेषण में तेज और राजनीतिक परिस्थितियों की समझ रखते हैं. देश-दुनिया की घटनाओं पर बारीक नजर और फिर उसे खबरों के रूप में लिखने के शौकीन हैं. View all posts by Saurabh Singh
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