
उत्तर प्रदेश सरकार ने गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में सिंचाई से जुड़ी एक बड़ी परियोजना को मंजूरी दी। इसके तहत 1.5 क्यूसेक क्षमता वाले 1750 असफल राजकीय नलकूपों का पुनर्निर्माण किया जाएगा। 561.20 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना से करीब 1.75 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता फिर से बहाल होगी और 2.39 लाख कृषक परिवार लाभान्वित होंगे।
दो साल में पूरा करने का लक्ष्य
परियोजना की लागत का 95% हिस्सा नाबार्ड और 5% राज्य सरकार वहन करेगी। इसे 2025-26 से 2026-27 के दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है। फिलहाल प्रदेश में 36,094 राजकीय नलकूप संचालित हैं, जबकि 62 जिलों में 1750 नलकूप बंद पड़े हैं। ये वे नलकूप हैं, जो 17 साल या 57 हजार घंटे चलने की सीमा पूरी कर चुके हैं और जिनका जल निकास बेहद कम हो गया है।
नहर विहीन क्षेत्रों को प्राथमिकता
परियोजना में ऐसे इलाकों को शामिल किया गया है, जहां नहरों के जरिए सिंचाई सुविधा उपलब्ध नहीं है। सभी नलकूप इन्हीं क्षेत्रों में पुनर्निर्मित होंगे, जिससे खासतौर पर लघु और सीमांत किसानों को फायदा मिलेगा।
सिंचाई व्यवस्था सुधरेगी
इसके साथ ही खाद्यान्न उत्पादन में बढ़ोतरी होगी, सिंचाई व्यवस्था सुधरेगी और 16 लाख से अधिक मानव दिवसों का सृजन होगा। अनुमान है कि परियोजना की प्रति हेक्टेयर लागत ₹32,369 रुपये होगी।
