उत्तराखंड: जंगली जानवरों के हमलों पर कांग्रेस का हल्ला बोल, वन विभाग मुख्यालय घेरकर दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

उत्तराखंड में जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों को लेकर कांग्रेस ने देहरादून में वन विभाग मुख्यालय का घेराव किया। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया गया और जल्द कार्रवाई न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई।
उत्तराखंड: जंगली जानवरों के हमलों पर कांग्रेस का हल्ला बोल, वन विभाग मुख्यालय घेरकर दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

देहरादून। उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष के बढ़ते मामलों को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने देहरादून स्थित वन विभाग मुख्यालय का घेराव किया और जमकर प्रदर्शन किया।

कांग्रेस ने राज्य सरकार और वन विभाग पर जंगली जानवरों के हमलों को रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली। कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की।

सरकार पर लापरवाही का आरोप

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि प्रदेश के पर्वतीय और मैदानी, दोनों क्षेत्रों में जंगली जानवरों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे आम लोगों में दहशत का माहौल है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की कथित लापरवाही और उदासीनता के कारण लोग अपनी जान गंवा रहे हैं, लेकिन विभाग कोई इफेक्टिव कार्ययोजना बनाने में विफल रहा है।

‘समाधान नहीं तो उग्र आंदोलन होगा’

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे गणेश गोदियाल ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इस गंभीर मुद्दे पर जल्द कोई कार्रवाई नहीं की गई तो कांग्रेस पूरे राज्य में एक उग्र आंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने ग्रामीणों की सुरक्षा और मुआवजा नीति को लेकर भी सवाल उठाए।

“सरकार को जंगलों के पास रहने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की नीति भी स्पष्ट की जानी चाहिए। अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो यह आंदोलन और भी बड़ा और उग्र होगा।” — गणेश गोदियाल, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस

कांग्रेस ने मांग की कि सरकार मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए एक लॉन्ग टर्औम र इफेक्टिव स्ट्रेटजी बनाए ताकि लोगों के जीवन की रक्षा हो सके। पार्टी ने स्पष्ट किया कि यह प्रदर्शन केवल एक चेतावनी है और अगर सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।

Ankita Chourdia
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