
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बृहस्पतिवार को वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के साथ संवाद कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने प्रदेश के हर जिले में एक-एक वृद्धाश्रम स्थापित करने, दिव्यांगजन से विवाह करने पर प्रोत्साहन राशि को 25,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये करने और कक्षा एक से आठ तक पढ़ने वाले दिव्यांग छात्रों के लिए छात्रवृत्ति हेतु आय सीमा समाप्त करने का ऐलान किया।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने दिव्यांग शादी अनुदान और राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के पोर्टल की शुरुआत भी की। साथ ही समाज कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत दी जा रही पेंशन की वित्त वर्ष 2025–26 की पांचवीं किस्त का ऑनलाइन भुगतान किया। उन्होंने कहा कि सरकार बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से कर रही है।
दिव्यांग से विवाह पर प्रोत्साहन राशि बढ़ाई गई
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि दिव्यांग युवक-युवती से विवाह करने पर दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया गया है। पहले यह राशि 25,000 रुपये थी। उन्होंने कहा कि यह कदम समाज में दिव्यांगजनों को सम्मान दिलाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से उठाया गया है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि राज्य में पहले से ही ‘माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम’ लागू है, जिससे बुजुर्गों को अपने बच्चों या कानूनी उत्तराधिकारियों से भरण-पोषण का कानूनी अधिकार प्राप्त है।
दिव्यांग छात्रों के लिए आय सीमा समाप्त
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी राहत की घोषणा की। उन्होंने कहा कि कक्षा एक से आठ तक पढ़ने वाले दिव्यांग छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति के लिए अब आय सीमा की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। इससे राज्य के सैकड़ों बच्चों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। धामी ने यह भी कहा कि हाल ही में देहरादून में ‘प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र’ शुरू किया गया है और भविष्य में प्रत्येक जिले में ऐसे केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
योजनाओं की शुरुआत और पेंशन किस्त जारी
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर दिव्यांग शादी अनुदान और राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के पोर्टल का शुभारंभ किया। इसके साथ ही समाज कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत मिलने वाली पेंशन की वित्त वर्ष 2025–26 की पांचवीं किस्त का ऑनलाइन भुगतान किया। उन्होंने कहा कि इस संवाद का उद्देश्य बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की समस्याओं को सीधे समझना और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाना है।
