उत्तराखंड: पीटीए शिक्षक आज सीएम आवास करेंगे कूच, नियमित मानदेय की मांग तेज

उत्तराखंड: पीटीए शिक्षक आज सीएम आवास करेंगे कूच, नियमित मानदेय की मांग तेज

उत्तराखंड में अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों के पीटीए शिक्षक अब आर-पार के मूड में आ गए हैं। आठ साल से लगातार सेवा देने के बावजूद सरकारी मानदेय से वंचित रखे जाने पर उनकी नाराजगी चरम पर पहुंच गई है। अपनी एक सूत्री मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे शिक्षक अब सोमवार को मुख्यमंत्री आवास कूच करने जा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार बार-बार आश्वासन तो देती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी समस्या का हल नहीं हो पा रहा है।


 आठ साल सेवा, फिर भी मानदेय से वंचित

पीटीए शिक्षकों ने साफ कहा है कि आठ वर्षों से शिक्षण कार्य करने के बावजूद उन्हें सरकारी मानदेय का लाभ नहीं दिया गया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष नीरज कुमार ने बताया कि शिक्षक लंबे समय से अपनी मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सरकार लगातार अनदेखी कर रही है। इससे शिक्षकों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब अन्य अशासकीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को मानदेय का लाभ दिया जा चुका है, तो उनके साथ ऐसा भेदभाव क्यों हो रहा है। इसी अन्याय के विरोध में उन्होंने सीएम आवास कूच करने का निर्णय लिया है।


 सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप

संगठन का आरोप है कि सरकार ने पूर्व में रखे गए शिक्षकों को मानदेय देने के बाद तदर्थ नियुक्ति दी, लेकिन उसके बाद नियुक्त हुए शिक्षकों को पूरी तरह नज़रअंदाज कर दिया गया। प्रदेश महामंत्री कल्पना सेमवाल ने कहा कि यह दोहरा रवैया शिक्षकों के साथ नाइंसाफी है। उन्होंने बताया कि 30 जून 2016 के बाद नियुक्त हुए शिक्षकों को मानदेय श्रेणी से बाहर कर दिया गया है। यह तारीख ही उनकी सबसे बड़ी समस्या है। उनकी मांग है कि इसे संशोधित कर 30 जून 2025 किया जाए ताकि सभी पीटीए शिक्षक लाभान्वित हो सकें।


संशोधित तिथि की मांग

शिक्षकों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन और तेज होगा। उन्होंने कहा कि जब अन्य राज्यों में पीटीए शिक्षकों को मानदेय और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं, तो उत्तराखंड में ऐसा क्यों नहीं हो रहा। उनका कहना है कि 30 जून 2016 की तय सीमा को बढ़ाकर 30 जून 2025 करना ही न्यायपूर्ण समाधान है। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में आंदोलन बड़ा रूप ले सकता है और इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

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