राजधानी में 2 आशा कार्यकर्ता कोरोना पॉजिटिव, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

राजधानी में 2 आशा कार्यकर्ता कोरोना पॉजिटिव, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

भोपाल। स्वास्थय विभाग (HEALTH DEPARTMENT)में कोरोना (CORONA)से संक्रमित होने वाले कर्मचारियों का सिलसिला रूकने का नाम नही ले रहा है| रविवार को शहर की 2 आशा कार्यकर्ता कोरोना पॉजिटिव (CORONA पाई गईं| जिसके बाद स्वास्थय विभाग में भूचाल आ गया| क्योंकि शहर में स्क्रीनिंग का काम आशा कार्यकर्ताओं के ही जिम्मे है| शहरी और ग्रामीण इलाकों में एक आशा कार्यकर्ता पर कम से कम 7 हजार लोगों की जिम्मेदारी है,ऐसे में जब दो कार्यकर्ता कोरोना पॉजिटिव हैं तो 14 हजार लोगों पर संक्रमण का खतरा इस समय मंडरा रहा है| इतना ही नहीं इन 2 कार्यकर्ताओँ के पॉजिटिव आने के बाद शहर की 80 आशा कार्य़कर्ताओँ पर भी इस समय कोरोना संक्रमण का खतरा बढ गया है|

गौरतलब है कि शुक्रवार को ईंटखेडी में आशा कार्यकर्ताओँ की एक मीटिंग हुई थी, जिसमें 25 से ज्यादा आशा कार्य़कर्ताएं शामिल हुई थीं| लेकिन अब तक इनमें से किसी भी कार्य़कर्ता का सैंपल नहीं लिया गया है|

निगम का कर्मचारी भी कोरोना पॉजिटिव
रविवार को 27 कोरोना पॉजिटिव (CORONA आए मरीजों में नगर निगम का एक कर्मचारी सुभाष जोशी भी शामिल है| सुभाष जोशी को दीनदयाल रसोई का जिम्मा दिया गया था और यह बीते कई दिनों से निगम के बड़े अधिकारियों के भी लगातार संपर्क में थे|जोशी के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद रसोई से जुड़े सभी अपर आयुक्त, उपायुक्त क्वारंटाइन हो गए हैं| इसी के ही साथ रसोई से जुड़े करीब 25 कर्मचारी भी संदिग्ध की श्रेणी में आ गए हैं|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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