कर्मवीर योद्धाओं का 50 लाख का बीमा, शहीद पुलिसकर्मी के परिवार को 1 करोड़ दे सरकार: कमलनाथ

कर्मवीर योद्धाओं का 50 लाख का बीमा, शहीद पुलिसकर्मी के परिवार को 1 करोड़ दे सरकार: कमलनाथ

भोपाल| इंदौर में कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे जुनी थाने के प्रभारी देवेन्द्र चंद्रवंशी का शनिवार देर रात निधन हो गया| उनकी मौत पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दुःख जताया है| साथ ही उन्होंने सरकार से जनता की सुरक्षा के लिए फील्ड में तैनात कर्मवीरो को 50 लाख के बीमा और मृत पुलिस अधिकारी को शहीद का दर्जा देकर परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की है|

कमलनाथ ने ट्वीट कर लिखा-“मैं आज एक बार फिर सरकार से यह माँग कर रहा हूँ कि जनता की सुरक्षा के लिये अपनी जान को जोखिम में डाल ,फ़ील्ड में काम कर रहे डॉक्टर्स , स्वास्थ्यकर्मी,पुलिस कर्मी,मेडिकल स्टाफ़, आशा कार्यकर्ता, अधिकारी-कर्मचारीगण ही जिस प्रकार से बड़ी संख्या में कोरोना से संक्रमित होते जा रहे है, सभी को तत्काल पीपीई किट , मास्क से लेकर सुरक्षा के आवश्यक सारे संसाधन उपलब्ध कराये जाये। फ़ील्ड में काम कर रहे इन सभी कर्मवीर योद्धाओं को अन्य राज्यों की तरह 50 लाख के बीमा के दायरे में लाकर सुरक्षा कवच प्रदान की जावे।

पूर्व सीएम ने अगले ट्वीट में कहा “मैं सरकार से यह भी माँग करता हूँ कि प्रदेश के जिन जिलो में कोरोना अभी तक नहीं पहुँचा है या जहाँ कोरोना संक्रमण के कम मामले है , वहाँ के पुलिस फ़ोर्स को तत्काल कोरोना प्रभावित रेड हॉट स्पॉट जिलो में पदस्थ किया जावे”।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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