राजधानी में बेकाबू हुआ कोरोना, 86 नए पॉजिटिव मिले, रविवार को लॉकडाउन

राजधानी में बेकाबू हुआ कोरोना, 86 नए पॉजिटिव मिले, रविवार को लॉकडाउन

भोपाल| मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल (Bhopal) में लगातार हालात बिगड़ते जा रहे हैं| यहां रोज बड़ी संख्या में नए मरीज सामने आ रहे हैं| शनिवार को राजधानी में 86 नए पॉजिटिव मरीज मिले है। इससे पहले मंगलवार को 86 कोरोना संक्रमित मिले थे। हालांकि, इससे पहले पिछले महीने दो दिन सबसे ज्यादा लगातार 78-78 मरीज मिले थे। अब राजधानी में संक्रमितों की संख्या 3503 पर पहुंच गई।

जो नए संक्रमित मिले हैं वो पॉश इलाके से हैं, अरेरा कॉलोनी के चार, सैनिक कॉलोनी बैरागढ़ में सात, अचारपुरा में तीन, पलक होटल पंजाबी बाग में दो और बैरसिया में दोपॉजिटिव मरीज मिले हैंं। वहीं एम्‍स और हमीदिया में दो लोग पॉजिटिव आए हैं। इधर, राजधानी में 30 संक्रमित मरीज स्‍वस्‍थ होकर घर रवाना हो गए हैं। इस तरह अब तक 2420 मरीजों ने कोरोना से जंग जीत ली है। वर्तमान में 1224 मरीजों का उपचार कोविड केयर अस्‍पतालों में चल रहा है। वहीं अब तक कुल 116 लोगों की मौत हो चुकी है। अब 31 जुलाई तक हर रविवार को भोपाल समेत पूरे मध्यप्रदेश लॉकडाउन रहेगा।

इब्राहिमगंज 12 से 19 जुलाई टोटल लॉकडाउन
इब्राहिमगंज क्षेत्र में 12 जुलाई यानि रविवार सुबह से 19 जुलाई की रात तक के लिए टोटल लॉकडाउन कर दिया जाएगा। कलेक्टर के आदेश के मुताबिक, इस क्षेत्र में दूध, दवा, किराना समेत सभी दुकानें बंद रहेंगी। नगर निगम जरूरी सामान की सप्लाई करेगा। यहां लोगों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। वहीं राजधानी में रविवार को जरूरी सेवाओं को छोड़कर सभी चीजें प्रतिबंधित रहेंगी।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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